इस बार पंचक में रक्षाबंधन, क्या इस दौरान भाई को राखी बांध सकते हैं? जानें नियम और वर्जित काम, बहनें ये काम जरूर करें…
रक्षाबंधन 2026 के दिन पंचक रहेगा। जानें 27 अगस्त से 1 सितंबर तक पंचक कब रहेगा, क्या पंचक में भाई को राखी बांध सकते हैं और कौन से काम वर्जित माने जाते हैं।

नई दिल्ली। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पवित्र पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती है। रक्षाबंधन 2026 को लेकर इस बार पंचक की अवधि भी चर्चा में है, जिसके कारण कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या पंचक के दौरान राखी बांधना शुभ माना जाता है या नहीं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में पंचक को पांच नक्षत्रों का विशेष संयोग माना गया है। इस अवधि में कुछ विशेष कार्यों को वर्जित बताया गया है। हालांकि, पंचक को पूरी तरह अशुभ अवधि नहीं माना जाता और सभी प्रकार के काम इस दौरान निषिद्ध नहीं होते।
अगस्त 2026 में कब शुरू होगा पंचक?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अगस्त 2026 का पंचक 27 अगस्त, गुरुवार को दोपहर 1:35 बजे शुरू होगा और 1 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 3:23 बजे समाप्त होगा।इस कारण 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन पंचक रहेगा। पंचक की वजह से राखी बांधने को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
क्या पंचक में भाई को राखी बांध सकते हैं?
हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान भाई को राखी बांधी जा सकती है। पंचक को रक्षाबंधन जैसे पर्व पर राखी बांधने में सामान्यतः बाधक नहीं माना जाता है।इसलिए बहनें पंचक के दौरान भी अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। राखी बांधने की परंपरा को पंचक के कारण रोकने का कोई सामान्य धार्मिक विधान नहीं बताया जाता।हालांकि, जो लोग शुभ मुहूर्त का विशेष रूप से पालन करते हैं, वे स्थानीय पंचांग के अनुसार राखी बांधने और पूजा का शुभ समय जरूर देख सकते हैं।
क्या होता है अग्नि पंचक?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पंचक की शुरुआत यदि मंगलवार या गुरुवार से हो तो इसे अग्नि पंचक कहा जाता है। अगस्त 2026 में पंचक गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे अग्नि पंचक की श्रेणी में माना जाता है।मान्यता के अनुसार अग्नि पंचक के दौरान आग, निर्माण कार्य और मशीनरी या औजारों से जुड़े कुछ कार्यों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि, ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
पंचक में कौन-कौन से काम वर्जित माने जाते हैं?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
दक्षिण दिशा में यात्रा
पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता में दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है।
लकड़ी या ज्वलनशील सामग्री इकट्ठा करना
धनिष्ठा नक्षत्र से जुड़ी मान्यता के अनुसार पंचक में लकड़ी, घास या अन्य ज्वलनशील वस्तुएं इकट्ठा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
चारपाई या पलंग बनवाना
पंचक के दौरान नया पलंग या चारपाई बनवाने को भी वर्जित माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में परेशानी आ सकती है।
घर की छत का निर्माण
पंचक में घर की छत या लेंटर डलवाने को लेकर भी धार्मिक मान्यताओं में सावधानी बरतने की बात कही गई है। इसे घर में क्लेश और आर्थिक नुकसान से जोड़कर देखा जाता है।
अंतिम संस्कार
पंचक के दौरान मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार को लेकर विशेष धार्मिक विधि का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार पंचक में दाह संस्कार से पहले विशेष शांति कर्म किया जाता है।
पंचक में क्या खरीदना नहीं चाहिए?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। इनमें लकड़ी, लोहा, चारपाई और नए कपड़े जैसी वस्तुएं शामिल बताई जाती हैं।मान्यता है कि पंचक के दौरान इन वस्तुओं की खरीदारी करने से अशुभ परिणाम या आर्थिक नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
क्या पंचक में सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं?
ऐसा नहीं है। पंचक को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और पंचांगों में मान्यताएं मिलती हैं। सामान्यतः विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और कुछ बड़े मांगलिक कार्यों को पंचक में टालने की सलाह दी जाती है।वहीं, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, दैनिक कामकाज और कई सामान्य गतिविधियों को पंचक के कारण पूरी तरह रोकना जरूरी नहीं माना जाता। किसी विशेष संस्कार या मांगलिक कार्य के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग और विद्वान ज्योतिषाचार्य की सलाह लेना उचित रहेगा।
रक्षाबंधन पर क्या करें?
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते और प्रेम का पर्व है। पंचक होने के बावजूद राखी बांधने की परंपरा निभाई जा सकती है। बहनें भाई की आरती उतारकर, तिलक लगाकर और राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि की कामना कर सकती हैं। यदि परिवार में किसी विशेष परंपरा का पालन किया जाता है तो उसी के अनुसार पूजा और राखी बांधने का समय तय किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में पंचक, अग्नि पंचक और इससे जुड़े शुभ-अशुभ नियमों की जानकारी धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग और योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह लेना उचित है।












