आपका बच्चा भी देखता है मोबाइल: जानिये आपके बच्चे की आंखों को किस तरह का है खतरा, जानिए Digital Eye Syndrome के लक्षण और बचाव
घंटों मोबाइल देखने से आंखों में सूखापन, जलन और सिरदर्द जैसी परेशानी हो सकती है। जानिए Digital Eye Syndrome के लक्षण, 20-20-20 नियम और बचाव के तरीके।

Eye Care Tips : आज के समय में मोबाइल, कंप्यूटर और टैबलेट बच्चों से लेकर युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। कई बार मनाही के बावजूद बच्चे मोबाइल की लत छोड़ने को तैयार नहीं होते। बच्चे घंटों तक बिना ब्रेक स्क्रीन देखने की आदत आंखों पर असर डाल सकती है। लगातार स्क्रीन देखने वाले लोगों में आंखों में सूखापन, जलन, लालिमा, किरकिरापन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
इन्हीं लक्षणों को अक्सर Digital Eye Strain या Digital Eye Syndrome से जोड़ा जाता है।हिमाचल प्रदेश के सोलन क्षेत्रीय अस्पताल में भी स्क्रीन से जुड़ी आंखों की परेशानी के कई मामले सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां रोजाना करीब 25 से 30 मरीज डिजिटल आई सिंड्रोम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
एक साल के बच्चे भी दिखा रहे लक्षण
स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल अब केवल किशोरों और युवाओं तक सीमित नहीं है। छोटे बच्चों में भी मोबाइल देखने की आदत बढ़ने के साथ आंखों से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार पास की स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से आंखों को लगातार फोकस करना पड़ता है।
इससे आंखों में थकान और सूखापन महसूस हो सकता है। स्क्रीन देखते समय पलकें भी सामान्य से कम झपक सकती हैं, जिससे आंखों की सतह पर नमी कम होने की समस्या हो सकती है।खासकर मोबाइल को आंखों के बहुत करीब रखकर या अंधेरे कमरे में इस्तेमाल करने से असहजता बढ़ सकती है। हालांकि हर आंख की समस्या को सिर्फ मोबाइल के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर आंखों की जांच जरूरी है।
Digital Eye Syndrome के कौन-कौन से लक्षण हैं?
लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद अगर बार-बार ये समस्याएं महसूस हों तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—
• आंखों में सूखापन या जलन
• आंखों में लालिमा
• किरकिरापन या थकान
• बार-बार सिरदर्द
• कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देना
• आंखों में भारीपन
• रोशनी देखने में परेशानी
इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहे या बढ़ता जाए तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
आंखों को बचाने के लिए अपनाएं 20-20-20 नियम
स्क्रीन से आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है। इसके तहत हर 20 मिनट में करीब 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने की सलाह दी जाती है।इससे आंखों को लगातार पास की स्क्रीन पर फोकस करने से छोटा ब्रेक मिलता है और आंखों की थकान कम करने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल देखते समय पलकें झपकाते रहें
स्क्रीन पर ध्यान लगाकर देखने के दौरान अक्सर पलकें कम झपकती हैं। इससे आंखों की सतह सूख सकती है और जलन या किरकिरापन महसूस हो सकता है।इसलिए मोबाइल या कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में जानबूझकर पलकें झपकाना और स्क्रीन से छोटे ब्रेक लेना उपयोगी आदत हो सकती है।
स्क्रीन की ब्राइटनेस आंखों के हिसाब से रखें
बहुत तेज या बहुत कम रोशनी वाली स्क्रीन दोनों ही आंखों के लिए असहज हो सकती हैं। कमरे की रोशनी के अनुसार मोबाइल या कंप्यूटर की ब्राइटनेस को एडजस्ट करें।अंधेरे कमरे में तेज रोशनी वाली स्क्रीन देखने से बचें। साथ ही मोबाइल को आंखों के बिल्कुल पास रखकर देखने की आदत भी कम करें।
लगातार कई घंटे मोबाइल देखने से बचें
स्क्रीन टाइम को लगातार कई घंटे तक जारी रखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना बेहतर है। खासकर बच्चों के मामले में माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि मोबाइल मनोरंजन का लगातार साधन न बन जाए।सोने से ठीक पहले लंबे समय तक मोबाइल देखने की आदत को भी कम करना बेहतर है। जिन लोगों का काम ही कंप्यूटर या मोबाइल पर निर्भर है, उन्हें नियमित अंतराल पर स्क्रीन से नजर हटाकर दूर देखना चाहिए।
आंखों में दर्द या धुंधलापन हो तो डॉक्टर को दिखाएं
आंखों में बार-बार सूखापन, जलन, दर्द, लालिमा, धुंधला दिखाई देना या रोशनी से परेशानी को सिर्फ मोबाइल की थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।अगर परेशानी लगातार बनी रहती है, बढ़ रही है या देखने की क्षमता प्रभावित हो रही है तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी आई ड्रॉप का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
बच्चों के लिए माता-पिता रखें इन बातों का ध्यान
बच्चों में स्क्रीन इस्तेमाल की आदत पर नजर रखना जरूरी है। उन्हें लगातार मोबाइल देने के बजाय बीच-बीच में स्क्रीन से दूर रहने की आदत डालें। मोबाइल या टैबलेट को बहुत पास से देखने से रोकें और कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें।साथ ही बच्चों की नींद, आउटडोर गतिविधियों और स्क्रीन टाइम के संतुलन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
मोबाइल और दूसरी डिजिटल स्क्रीन आज की जरूरत हैं, लेकिन लगातार और बिना ब्रेक इस्तेमाल करने से आंखों में परेशानी हो सकती है। 20-20-20 नियम, नियमित ब्रेक, सही स्क्रीन दूरी और पर्याप्त आराम जैसी छोटी आदतें आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकती हैं। लगातार लक्षण होने पर घरेलू उपायों के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।












