कोर्ट न्यूज : गैंगरेप केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद; पीड़िता को मुआवजे का आदेश
कोडरमा पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और भाई को बंधक बनाने के मामले में दो दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

कोडरमा। गैंगरेप के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है। नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और उसके भाई को बंधक बनाकर मारपीट करने के मामले में कोडरमा की विशेष पॉक्सो अदालत ने दो दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश सचिंद्रनाथ सिंह ने शनिवार को यह फैसला सुनाया।अदालत ने दोषियों पर अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि अलग-अलग धाराओं में दी गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
दो आरोपियों को दोषी ठहराया गया
पॉक्सो केस संख्या 01/2025 में अदालत ने दिबोर निवासी रोहित कुमार उर्फ रोहित रजवार (19) और चंदन कुमार (20) को दोषी माना।दोनों को POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत आजीवन सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। इसके अलावा BNS की धारा 76 के तहत पांच वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।अदालत ने BNS की धारा 115(2) के तहत एक वर्ष और धारा 126(2) के तहत एक माह के कारावास की सजा भी सुनाई।
भाई को बांधकर वारदात को दिया गया अंजाम
मामला वर्ष 2024 का है। इस संबंध में कोडरमा थाना कांड संख्या 240/2024 दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार, नाबालिग अपने भाई के साथ पहाड़ी क्षेत्र में ढिबरा चुनने गई थी। वहां आरोपियों ने दोनों को पकड़ लिया। आरोप है कि मारपीट के बाद भाई-बहन को जंगल की ओर ले जाया गया।अभियोजन पक्ष के मुताबिक, नाबालिग के भाई के हाथ-पैर बांधकर उसे पेड़ से बांध दिया गया था। इसके बाद उसके सामने ही नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
कई घंटे तक चली वारदात, लूट का भी आरोप
मामले की प्राथमिकी में बताया गया कि घटना दोपहर करीब 12 बजे से रात करीब 9 बजे तक चली। आरोपियों पर नाबालिग के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था।इसके अलावा पीड़िता के नाक, कान और गले से आभूषण ले जाने तथा उसके भाई का मोबाइल फोन और 1,200 रुपये नकद छीनने का भी आरोप था।प्राथमिकी के मुताबिक, घटना के बाद दोनों भाई-बहन को धमकाया गया था और किसी को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी।
10 गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने अभियोजन की ओर से पक्ष रखा और दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की।वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।अदालत ने गवाहों के बयान, दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
पीड़िता को मुआवजा देने का निर्देश
अदालत ने दोषियों को सजा सुनाने के साथ ही पीड़िता के पुनर्वास से जुड़ा निर्देश भी दिया है। पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को मुआवजा उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में शामिल एक अन्य आरोपी घटना के समय नाबालिग था। इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत अलग से चल रही है।
अलग-अलग धाराओं की सजा, लेकिन साथ चलेगी
कोर्ट के आदेश के अनुसार POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत आजीवन सश्रम कारावास के अलावा BNS की विभिन्न धाराओं में भी सजा दी गई है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।POCSO एक्ट और BNS की धारा 76 के तहत लगाए गए जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर दोषियों को आदेश के मुताबिक अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।











