मां की छांव भी छिन गई… रूपी सोरेन के निधन से टूटे हेमंत सोरेन, लिखा- ‘बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं’

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन से पूरा सोरेन परिवार गहरे शोक में डूब गया है। 7 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। मां के निधन की खबर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भीतर तक झकझोर दिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए अपनी मां को याद किया और लिखा कि पिता शिबू सोरेन के जाने के बाद वही उनकी सबसे बड़ी छांव थीं, लेकिन अब वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गई। आज दोपहर बाद रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार होगा। इससे पहले उनका अंतिम दर्शन गुरुजी के आवास पर हुआ।
हेमंत सोरेन ने बेहद भावुक होकर लिखा, “बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं. आज वह छाँव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं. माँ….”
मुख्यमंत्री के इस छोटे से संदेश में मां को खोने का गहरा दर्द साफ महसूस होता है। कुछ समय पहले ही हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को खोया था। पिता के निधन के बाद मां रूपी सोरेन उनके लिए परिवार की उस मजबूत छांव की तरह थीं, जिसके सहारे वह इस कठिन दौर से गुजर रहे थे। अब मां के चले जाने से उनके जीवन का वह सहारा भी छिन गया।
मां की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल ही बन गया हेमंत का ठिकाना
रूपी सोरेन की तबीयत बिगड़ने के बाद हेमंत सोरेन लगातार उनके इलाज को लेकर चिंतित रहे। मां के अस्पताल में भर्ती होने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने कई कार्यक्रम रद्द कर दिए थे। बताया गया कि वह अस्पताल से बाहर नहीं निकले और लगातार अपनी मां के स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे।
मुख्यमंत्री की यह मौजूदगी सिर्फ एक बेटे की चिंता नहीं, बल्कि उस रिश्ते की गहराई को भी दिखाती है, जिसमें मां की बीमारी के सामने मुख्यमंत्री पद की तमाम जिम्मेदारियां भी पीछे छूट गई थीं।

एक के बाद एक झटके से गुजरा परिवार
हेमंत सोरेन के लिए यह समय बेहद कठिन रहा है। पिता शिबू सोरेन के निधन के कुछ ही समय बाद मां रूपी सोरेन का भी साथ छूट गया। पिता के जाने के बाद मां उनके लिए भावनात्मक सहारा बनी हुई थीं।
ऐसे समय में जब राजनीतिक जीवन की जिम्मेदारियां लगातार बनी हुई थीं, परिवार की यह दूसरी बड़ी क्षति हेमंत सोरेन के लिए व्यक्तिगत तौर पर बेहद पीड़ादायक है।
बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं। आज वह छाँव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं।
माँ….
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) October 7, 2026
किडनी और पेट की बीमारी से जूझ रही थीं रूपी सोरेन
रूपी सोरेन लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। उन्हें किडनी और पेट से जुड़ी समस्याएं थीं। इसके अलावा शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या भी बताई गई थी। किडनी की स्थिति को देखते हुए उनका नियमित डायलिसिस चल रहा था।स्वास्थ्य में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच परिवार और डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।
17 सितंबर से शुरू हुआ था मुश्किल दौर
रूपी सोरेन की तबीयत 17 सितंबर की देर रात अचानक बिगड़ी थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उनकी स्थिति में कभी सुधार हुआ तो कभी फिर गिरावट आई।
- 17 सितंबर: देर रात आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ी।
- 18 सितंबर: सुबह उन्हें हिल व्यू अस्पताल लाया गया।
- 19 सितंबर: स्वास्थ्य बिगड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया।
- 20 सितंबर: उनकी हालत गंभीर हुई और वह बेहोश हो गईं।
- 25 सितंबर: इलाज के बाद स्वास्थ्य में कुछ सुधार के संकेत मिले।
- 30 सितंबर: उन्हें होश आया।
- 5 अक्टूबर: उनकी तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई।
- 6 अक्टूबर: डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी रही।
- 7 अक्टूबर: हालत बेहद नाजुक हो गई और रात करीब 8:30 बजे उनका निधन हो गया।
मां की याद में बस इतना ही कह पाए हेमंत…
राजनीतिक मंचों पर दृढ़ता के साथ अपनी बात रखने वाले हेमंत सोरेन जब मां को याद कर रहे थे, तो शब्द जैसे कम पड़ गए। सोशल मीडिया पर लिखा उनका छोटा-सा संदेश ही उनके दर्द को बयां कर गया।
“बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं…”
एक बेटे के लिए इससे बड़ा दुख शायद ही कोई हो कि पहले पिता का साथ छूटे और कुछ ही समय बाद मां भी दुनिया से विदा हो जाएं। रूपी सोरेन के निधन के साथ हेमंत सोरेन ने न सिर्फ अपनी मां को खोया है, बल्कि उस भावनात्मक सहारे को भी खो दिया है, जिसे उन्होंने खुद अपनी सबसे बड़ी ‘छांव’ कहा था।
अब उस छांव की सिर्फ यादें हैं… और मां की वह ममता, जो हमेशा उनके साथ रहेगी।












