VIDEO- रूपी सोरेन की आखिरी सार्वजनिक वीडियो: इसी साल जून में व्हीलचेयर पर पहुंची थी, खुद राष्ट्रपति कुर्सी छोड़ पहुंची थी उनके पास, प्रधानमंत्री ने भी किया था प्रणाम, देखिये वीडियो
रूपी सोरेन की आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी से जुड़ी खास कहानी। जून 2026 में व्हीलचेयर पर राष्ट्रपति भवन पहुंचकर उन्होंने दिवंगत पति शिबू सोरेन का पद्म भूषण ग्रहण किया था।

रांची। कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, वे अपने भीतर एक पूरा दौर समेटे होती हैं। रूपी सोरेन की भी एक ऐसी ही तस्वीर अब उनकी अंतिम सार्वजनिक मौजूदगी की याद बन गयी है। 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में वह व्हीलचेयर पर पहुंची थीं—अपने लिए नहीं, बल्कि अपने जीवनसाथी और झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन के लिए।
उसी दिन उन्हें अपने दिवंगत पति का मरणोपरांत पद्म भूषण ग्रहण करना था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-II में वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान किए थे। शिबू सोरेन को सार्वजनिक मामलों के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। आज रूपी सोरेन नहीं हैं। लेकिन उनकी वह आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी, जिसमें वह पति की विरासत को अपने हाथों से स्वीकार करने राष्ट्रपति भवन पहुंची थीं, उनके जीवन की बेहद मार्मिक तस्वीरों में शामिल हो गयी है।
व्हीलचेयर पर पहुंची थीं, लेकिन चेहरे पर था भाव
रूपी सोरेन उस वक्त पूरी तरह स्वस्थ नहीं थीं। व्हीलचेयर पर बैठकर वह समारोह में पहुंची थीं। शरीर साथ नहीं दे रहा था, लेकिन जिस व्यक्ति के साथ उन्होंने जीवन का लंबा सफर तय किया, उसकी उपलब्धि को स्वीकार करने के लिए वह खुद वहां मौजूद थीं।शिबू सोरेन के नाम की घोषणा हुई तो रूपी सोरेन को मंच की ओर ले जाया गया। यह सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था। उनके लिए यह उस साथी की सार्वजनिक विरासत को थामने का क्षण था, जिसके साथ उन्होंने दशकों का जीवन बिताया था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु खुद आगे बढ़ीं
उस समारोह की सबसे यादगार तस्वीरों में एक वह पल रहा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मान देने के लिए आगे बढ़ीं। रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर थीं और राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल की औपचारिक दूरी के बजाय आगे बढ़कर उनके पास जाकर सम्मान प्रदान किया।राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक समारोह में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। रूपी सोरेन ने व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे अपने पति शिबू सोरेन के नाम का वह सम्मान ग्रहण किया।
पति के लिए मिला सम्मान, पत्नी बनीं उसकी साक्षी
शिबू सोरेन को यह सम्मान उनके सार्वजनिक जीवन और लोक कार्यों में योगदान के लिए मरणोपरांत दिया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें Public Affairs के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की जानकारी दर्ज है।
लेकिन उस दिन राष्ट्रपति भवन में शिबू सोरेन की अनुपस्थिति साफ महसूस की जा सकती थी। उनके नाम की घोषणा हुई और सम्मान लेने के लिए उनकी पत्नी सामने थीं।एक तरफ उस व्यक्ति की विरासत थी, जिसने झारखंड की राजनीति में दशकों बिताए। दूसरी तरफ वह जीवनसंगिनी थीं, जिन्होंने उस लंबे सफर को परिवार के भीतर से देखा था।
साथ थीं कल्पना सोरेन और अंजलि सोरेन
इस ऐतिहासिक क्षण में परिवार के सदस्य भी रूपी सोरेन के साथ मौजूद थे। बहू कल्पना सोरेन और बेटी अंजलि सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने इस सम्मान समारोह में हिस्सा लिया।रूपी सोरेन के लिए यह क्षण भावनाओं से भरा रहा होगा—एक तरफ पति की उपलब्धि और दूसरी तरफ उनकी अनुपस्थिति।
उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था, यही आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी बनेगी
23 जून को राष्ट्रपति भवन में मौजूद रूपी सोरेन की तस्वीरों को देखकर शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह उनकी आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी में से एक होगी।इसके बाद उनकी तबीयत लगातार खराब होती गयी। वह इलाज के लिए अस्पताल जाती रहीं और कुछ समय बाद स्वास्थ्य में सुधार के बाद घर भी लौटीं। पिछले महीने हैदराबाद में भी उनका इलाज हुआ था।लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गयी।
अस्पताल से मिली आखिरी खबर
सांस लेने में परेशानी के बाद रूपी सोरेन को रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी स्थिति पिछले कई दिनों से नाजुक बनी हुई थी। इलाज के दौरान उनकी हृदय गति भी अनियंत्रित हो गयी।परिवार और चिकित्सकों की कोशिशों के बीच आखिरकार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे रूपी सोरेन का निधन हो गया।जिस महिला ने जून में व्हीलचेयर पर बैठकर अपने दिवंगत पति का सम्मान ग्रहण किया था, कुछ ही महीनों बाद वही तस्वीर उनकी आखिरी सार्वजनिक याद बन गयी।
एक तस्वीर, जिसमें पूरा जीवन समाया है
रूपी सोरेन की आखिरी सार्वजनिक तस्वीर को अगर ध्यान से देखा जाए तो उसमें सिर्फ एक सम्मान समारोह नजर नहीं आता।उसमें एक पत्नी है, जो अपने दिवंगत पति का सम्मान लेने पहुंची है।उसमें एक मां है, जिसने अपने परिवार को संघर्षों के बीच संभाला।
और उसमें एक ऐसी महिला है, जिसने झारखंड के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार के उतार-चढ़ाव को बेहद करीब से देखा।23 जून की वह तस्वीर अब रूपी सोरेन की आखिरी सार्वजनिक यादों में दर्ज हो गयी है—व्हीलचेयर पर बैठी रूपी सोरेन, सामने देश की राष्ट्रपति और हाथों में अपने जीवनसाथी शिबू सोरेन का पद्म भूषण।शायद उन्हें भी नहीं पता था कि पति की विरासत को अपने हाथों से थामने का वह क्षण, उनकी जिंदगी का आखिरी सार्वजनिक अध्याय बन जाएगा।












