वो वादा अधूरा रह गया ! सोहराय में नेमरा आने का वादा कर गई थीं रूपी सोरेन, क्या पता था अब कंधे पर आएंगी चाची…

रामगढ़। नेमरा के पैतृक आंगन में लोग जमा हैं। घर के बरामदे में खामोशी पसरी है। चेहरों पर दुख है और आंखों में उस अपनापन की याद, जो अब कभी लौटकर नहीं आएगा। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के निधन की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव नेमरा पहुंची, परिवार और आसपास के लोग स्तब्ध रह गए।
गोला प्रखंड के नेमरा गांव स्थित पैतृक आवास में परिवार के सदस्य एक जगह बैठ गए। गौतनी दीपमणी, भतीजी रेखा सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य रूपी सोरेन की यादों में डूबे हैं। आसपास के गांवों से भी लोग धीरे-धीरे नेमरा पहुंचने लगे हैं। हर कोई भारी मन से घर की ओर बढ़ रहा है।
लेकिन इस मातम के बीच एक बात बार-बार याद आ रही है—रूपी सोरेन ने कहा था कि सोहराय में फिर नेमरा आएंगी।
उन्हें क्या पता था कि चाची का इंतजार करते जिस आंगन की ओर निगाहें लगी थीं, वहां अब वह जीवित नहीं, बल्कि अंतिम विदाई के लिए आएंगी।
“चाची बोली थीं, सोहराय में फिर आएंगी…”
भतीजी रेखा सोरेन ने नम आंखों से चाची रूपी सोरेन को याद किया। उन्होंने बताया कि चाची का बचपन से ही परिवार के लोगों से गहरा लगाव रहा। वह सभी को बहुत प्यार और स्नेह देती थीं।
रेखा के मुताबिक, चार अगस्त को बाबा शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि के मौके पर रूपी सोरेन नेमरा आई थीं। उस दिन परिवार के लोगों से मुलाकात हुई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि वह सोहराय के समय फिर नेमरा आएंगी।
किसी ने नहीं सोचा था कि यह मुलाकात आखिरी मुलाकात बन जाएगी और सोहराय में आने का वह वादा अधूरा रह जाएगा।
जिस आंगन में त्योहार मनाने आना था, वहीं अब अंतिम विदाई होगी
नेमरा का वही घर, जहां परिवार रूपी सोरेन के आने का इंतजार कर रहा था, अब शोक में डूबा है। जिस आंगन में त्योहार के दौरान हंसी-खुशी और मिलना-जुलना होना था, वहां अब मातम है।
रेखा सोरेन कहती हैं कि बचपन से ही चाचा शिबू सोरेन के साथ रहने के कारण परिवार का उनसे गहरा लगाव रहा। चाची रूपी सोरेन भी सभी को अपनेपन से रखती थीं। उनका प्यार और स्नेह परिवार के लोगों के लिए हमेशा खास रहा।
अब उन्हीं यादों के सहारे परिवार उनके जाने के गम को सहने की कोशिश कर रहा है।
एक वादा… जो अब कभी पूरा नहीं होगा
कभी-कभी किसी अपने के कहे हुए छोटे-से वाक्य की कीमत उसके जाने के बाद समझ आती है। रूपी सोरेन का यह कहना कि “सोहराय में फिर आएंगी” भी शायद परिवार के लिए ऐसा ही एक वाक्य बन गया है।
तब यह एक सामान्य बातचीत थी। लेकिन अब वही बात याद बन गई है।नेमरा में परिवार के लोग हैं, गांव के लोग हैं, रिश्तेदार हैं और रूपी सोरेन की अनगिनत यादें हैं। मगर जिस शख्स के आने की उम्मीद थी, वह अब नहीं आएगा।
चाची ने त्योहार में आने का वादा किया था…
किसे पता था कि अब उनका इंतजार त्योहार के लिए नहीं, अंतिम विदाई के लिए होगा।
और नेमरा का वह आंगन, जहां रूपी सोरेन हंसते हुए अपने लोगों के बीच आती थीं, अब उन्हें अंतिम बार विदा करने के लिए तैयार है।












