IAS पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला पहुंच गयी आईएएस के बंगले, आधे घंटे तक चलता रहा हाईवोल्टेज ड्रामा, फिर बुला ली पुलिस …
The woman who accused the IAS officer of rape arrived at his bungalow, a high-voltage drama ensued for half an hour, and then the police were called.

IAS Sanjeev hans 04.01 26: IAS पर रेप लगाने वाली महिला ने आईएएस के बंगले पर जमकर बवाल काटा। पहले तो वो बंगले में घुसने की कोशिश करने लगी, लेकिन जब संतरी ने रोकने की कोशिश की तो पुलिस बुला लिया। काफी मनाने के बाद महिला को पुलिस साथ लेकर थाने आयी। पूरा मामला राजधानी पटना का है। जहां, IAS संजीव हंस पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला एडवोकेट गायत्री देवी अपने बेटे के साथ पटना स्थित उनके आवास पर पहुंच गयी।
गायत्री ने बेटे को पिता से मिलाने की जिद करने लगी, लेकिन जब गेट नहीं खुला, पुलिस बुलानी पड़ी और पूरा मामला हाईवोल्टेज ड्रामे में बदल गया। महिला ने गंभीर आरोप लगाए, जबकि पुलिस ने कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर आवेदन लेने से इनकार कर दिया।गायत्री देवी काफी देर तक गेट पर खड़ी रहीं और बेटे को लेकर संजीव हंस से मिलने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया।
आईएएस संजीव हंस के आवास के गेट पर तैनात कर्मियों ने बताया कि साहब फिलहाल घर पर मौजूद नहीं हैं, इसलिए उनसे मुलाकात संभव नहीं है। इसके बावजूद गायत्री देवी अपने बेटे के साथ करीब 30 मिनट तक गेट पर इंतजार करती रहीं। बच्चे की जिद और भावनात्मक स्थिति को देखते हुए जब बार-बार अनुरोध के बावजूद मुलाकात नहीं हो सकी, तो उन्होंने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को मौके पर बुला लिया।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम संजीव हंस के आवास पर पहुंची और अपने स्तर से बातचीत कर गेट खुलवाने की कोशिश की, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद पुलिस के सुझाव पर गायत्री देवी अपने बेटे के साथ शास्त्रीनगर थाने पहुंचीं, जहां उन्होंने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया।
“बेटा पिता से मिलने की जिद कर रहा था”
शास्त्रीनगर थाने में गायत्री देवी ने बताया कि उनका बेटा लगातार अपने पिता से मिलने की जिद कर रहा था। बच्चे का कहना था कि स्कूल में सभी बच्चों के पापा साथ रहते हैं, लेकिन उसके पापा क्यों नहीं हैं। इसी भावनात्मक दबाव के चलते वह बेटे को लेकर उसके पिता से मिलाने के लिए आवास पर पहुंची थीं।
गायत्री देवी का आरोप है कि संजीव हंस जानबूझकर मिलने से इनकार कर रहे हैं, जबकि वह उस समय आवास के अंदर ही मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बेटे के स्कूल में एडमिशन के दौरान संजीव हंस ने स्वयं उन्हें अपना आधार कार्ड दिया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह बच्चे के पिता हैं। उनका कहना है कि केवल पहचान स्वीकार करना ही काफी नहीं होता, एक पिता के रूप में जिम्मेदारियां निभाना भी जरूरी है।
पति-पत्नी की तरह साथ रहने का दावा
गायत्री देवी ने यह भी आरोप लगाया कि संजीव हंस इलाहाबाद (प्रयागराज) में उनसे मिलने आए थे और दोनों पति-पत्नी की तरह दो दिनों तक साथ रहे। इसके बावजूद अब वह न तो बेटे से मिल रहे हैं और न ही अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने इसे मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न बताया।
पुलिस ने आवेदन लेने से किया इनकार
गायत्री देवी के अनुसार, शास्त्रीनगर थाने में उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और पहले वहां स्थिति स्पष्ट होने दी जाए। इसी आधार पर पुलिस ने उनकी लिखित शिकायत स्वीकार नहीं की। महिला का कहना है कि इससे उन्हें और उनके बेटे को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।
पूरा मामला अब कानूनी, सामाजिक और मानवीय पहलुओं को लेकर चर्चा में है। सवाल यह है कि कोर्ट में लंबित मामले के बीच एक मासूम बच्चे के भावनात्मक अधिकार और जिम्मेदारियों का समाधान आखिर कैसे और कब होगा।









