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झारखंड- कर्मचारियों के नियमितिकरण की मांगें फिर हुई तेज, वित्त मंत्री से मुलाकात कर दैनिक वेतनभोगियों ने रखी रेगुलेराईजेशन की मांग

Jharkhand: Demands for regularization of employees have intensified again. Daily wage earners met with the Finance Minister and demanded regularization.

Jharkhand News : बजट सत्र की अगले महीने से शुरुआत होने वाली है। बजट के पहले एक बार फिर से संविदा व दैनिक वेतनभोगियों के नियमितिकरण की मांग तेज होने लगी है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोल से मिला और उन्हें अपनी मांगों से अवगत कराया। वित्त मंत्री पलामू प्रवास के दौरान मेदिनीनगर नगर निगम में वर्षों से कार्यरत दैनिक भत्ता और अनुबंध कर्मियों ने अपनी सेवा के नियमितीकरण की मांग को लेकर उनसे मुलाकात की।

कर्मियों ने बताया कि वे कठिन परिस्थितियों में भी नगर सेवाएं निभाते रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न तो स्थायित्व मिला और न ही सामाजिक सुरक्षा। वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे कर्मियों ने इस बार राज्य के वित्त मंत्री के सामने परेशानी को रखा । कर्मियों का कहना है कि नगर निगम की रीढ़ माने जाने वाले ये कर्मचारी दशकों से शहर की सफाई व्यवस्था और अन्य आवश्यक सेवाओं को संभालते आ रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें अस्थायी कर्मचारी के रूप में ही काम करना पड़ रहा है।

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कर्मियों के अनुसार नगर निगम मेदिनीनगर में 54 ऐसे कर्मचारी हैं, जो 10 वर्षों से अधिक समय से दैनिक भत्ता के आधार पर कार्यरत हैं। इसके अलावा लगभग 50 कर्मचारी ऐसे हैं, जो 5 वर्षों से अधिक अवधि से अनुबंध पर सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी कर्मियों ने अलग-अलग दौर में शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे भीषण गर्मी हो, तेज बारिश हो या कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का संकट—इन कर्मियों ने हर परिस्थिति में अपनी ड्यूटी निभाई।

वे न केवल सफाई कार्य, बल्कि नगर निगम से जुड़ी अन्य आवश्यक सेवाओं को भी सुचारू बनाए रखने में दिन-रात जुटे रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित वेतन मिलता है और न ही किसी प्रकार की सरकारी सुविधा। न पेंशन, न भविष्य निधि और न ही स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध है।

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प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री को बताया कि निगम में कई ऐसे कर्मचारी भी हैं, जो 20 से 25 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें केवल दैनिक भत्ता पर काम करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के लिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी असुरक्षा और अनिश्चितता का कारण बनी हुई है। कर्मियों ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि कुछ कर्मचारियों की सेवा के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।

चूंकि वे नियमित कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उनके परिवारों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या सरकारी लाभ नहीं मिल पाया, जिससे परिवार गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए।कर्मियों ने राज्य सरकार से स्पष्ट मांग की है कि जो कर्मचारी 10 वर्षों से अधिक समय से दैनिक भत्ता पर और 5 वर्षों से अधिक समय से अनुबंध पर कार्यरत हैं, उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए। नियमितीकरण से न केवल उनका वेतन बेहतर होगा, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता भी मिल सकेगी।

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कर्मियों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में सफाई कर्मियों और नगर सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को महत्व देती है, तो यह जरूरी है कि उनके साथ न्याय किया जाए। वर्षों की सेवा के बावजूद अस्थायी बने रहना उनके मनोबल को तोड़ता है।इस दौरान बिशुन राम, अंकित कुमार गौतम, छोटेलाल गुप्ता, मनोज राम, संजय राम, माया देवी, मदन राम, अनिल राम, आर्यन कुमार, संतोष कुमार, अमरेंद्र कुमार मेहता, पवन कुमार, मानव देवी, बेबी देवी, गुड्डू कुमार, सरिता, प्रभा, मेरून, चंदा देवी, पूनम देवी, गौतम कुमार, अखिलेश राम, प्रमोद राम और अजय राम सहित कई कर्मी मौजूद रहे।

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