झारखंड- 156 सुरक्षाकर्मी बर्खास्त: नौकरी से हटाने पर सुरक्षाकर्मियों का प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू, तत्काल नौकरी पर रखने…
Jharkhand - 156 security personnel dismissed: Security personnel protest against job termination, launch indefinite agitation, demand immediate reinstatement...

156 सुरक्षाकर्मियों को अचानक नौकरी से हटाए जाने के विरोध में सुरक्षाकर्मी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। सुरक्षाकर्मियों ने फैसले को मनमाना बताते हुए तत्काल बहाली की मांग की है। ये सुरक्षाकर्मी कांके स्थित केंद्रीय मानसिक चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) में वर्षों से कार्यरत थे
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रांची/4.2.26: कांके स्थित केंद्रीय मानसिक चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) में पिछले कई वर्षों से सेवाएं दे रहे 156 सुरक्षाकर्मियों को बिना किसी पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण के नौकरी से हटा दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बर्खास्त सुरक्षाकर्मियों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। सभी सुरक्षाकर्मी सीआईपी सुरक्षाकर्मी अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले 3 फरवरी से संस्थान परिसर के भीतर सीआईपी चौक के पास धरने पर बैठे हुए हैं।
आंदोलन कर रहे सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि वे बीते 15 से 20 वर्षों से सीआईपी में लगातार सेवाएं दे रहे थे। इस लंबे कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ कभी भी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई और न ही उनके कार्य को लेकर कोई गंभीर शिकायत सामने आई। इसके बावजूद 27 जनवरी 2026 को निजी सुरक्षा एजेंसी एसआईएस सिक्योरिटी के माध्यम से उन्हें सूचना दी गई कि अब उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है और सभी 156 सुरक्षाकर्मियों को एक साथ नौकरी से हटा दिया गया।
सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि यह फैसला पूरी तरह मनमाना, अन्यायपूर्ण और असंवेदनशील है। अचानक नौकरी से निकाले जाने के कारण उनके सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं और इस निर्णय से उनके बच्चों की पढ़ाई व घर की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
धरने पर बैठे सुरक्षाकर्मियों की प्रमुख मांग है कि सभी बर्खास्त सुरक्षाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए और इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मानसिक चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) के निदेशक ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति का अधिकार संस्थान के पास नहीं है। उन्होंने बताया कि सभी सुरक्षाकर्मी एक निजी सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से कार्यरत थे और यह पूरा मामला एजेंसी से संबंधित है। संस्थान प्रबंधन का कहना है कि वे नियमों के दायरे में रहते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।









