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पारा शिक्षकों की बड़ी खबर: JTET समकक्ष मान्यता पर सरकार तैयार नहीं, वार्ता के दौरान शिक्षा सचिव ने कानूनी बाध्यता बतायी, पढ़िये पूरी खबर

Big news for para teachers: Government not ready for JTET equivalent recognition, during talks Education Secretary said it is a legal obligation, read the full news

झारखंड के पारा शिक्षकों को फिलहाल JTET के समकक्ष मान्यता नहीं मिलेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता बरकरार रखी है, हालांकि कुछ अन्य मांगों पर आंशिक सहमति बनी है।
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रांची। झारखंड में पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) से जुड़ी एक अहम खबर सामने आयी है। लंबे समय से चली आ रही मांगों पर बुधवार को सरकार और शिक्षक संघ के बीच वार्ता हुई, लेकिन हाईलेवल चर्चा में फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। प्रदेश के करीब 38 हजार आकलन परीक्षा उत्तीर्ण पारा शिक्षकों को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के समकक्ष मान्यता देने की मांग को सरकार ने अस्वीकार कर दिया है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार शिक्षक बनने के लिए पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य है, जिसे दरकिनार नहीं किया जा सकता।

इस मौके पर शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने संघ प्रतिनिधियों को बताया कि वर्तमान कानूनी प्रावधानों के तहत ‘आकलन परीक्षा’ को JTET के बराबर मान्यता देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरी तरह से न्यायिक दिशा-निर्देशों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें कोई भी निर्णय लेने से पहले कानूनी पहलुओं का पालन करना आवश्यक है।

हालांकि, सरकार ने यह संकेत जरूर दिए हैं कि अगले सप्ताह तक इस मामले में अंतिम कानूनी राय सामने आ सकती है, जिसके बाद पुनर्विचार की संभावना बनी हुई है। बैठक में पारा शिक्षक संघ की ओर से ऋषिकांत तिवारी, दिलशाद अहमद और विकास कुमार चौधरी सहित कई प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को मजबूती से रखा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के हित में कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।

 

हालांकि, बैठक में कुछ सकारात्मक पहल भी सामने आईं। मृत पारा शिक्षकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया को तेज करने पर सहमति बनी है। इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इससे कई परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

वहीं, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग पर फिलहाल सहमति नहीं बन पाई। सरकार ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है, जिससे शिक्षकों में निराशा देखी जा रही है। इसके अलावा, 967 बर्खास्त पारा शिक्षकों की सेवा बहाली का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा।

सरकार ने संघ को निर्देश दिया है कि संबंधित शिक्षक सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ विभाग के समक्ष प्रस्तुत हों, ताकि उनके मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सके। इस मुद्दे पर आगे फिर से चर्चा होने की संभावना है।वर्ष 2024 में मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है।कुल मिलाकर, इस बैठक में पारा शिक्षकों की सबसे बड़ी मांग पर फिलहाल कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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