झारखंड कांग्रेस में मचा बवाल, मंत्री-अध्यक्ष फिर हुए आमने-सामने, वायरल हुए पत्र के बाद, अब एक खेमा इस्तीफा देने की तैयारी में….
Jharkhand Congress in turmoil, ministers and president face off again, after a viral letter, one faction is now preparing to resign.

झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के बीच मची खींचतान फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही है। अब वित्त मंत्री ने अध्यक्ष पर तीखा हमला करते हुए लगातार दूसरे दिन पार्टी प्रभारी को पत्र लिखा है। पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने और बड़े पैमाने पर इस्तीफों की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
________________________________________
रांची। झारखंड कांग्रेस के अंदर मचा तूफान फिलहाल शांत नहीं हो रहा है। पिछले 48 घंटे में विवाद और भी आक्रामक हो गया है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने लगातार दूसरे दिन पार्टी के प्रदेश प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की, जिसे बाद में इंटरनेट मीडिया पर भी साझा कर दिया गया।
पत्र में राधाकृष्ण किशोर का आक्रोश साफ झलकता है। उन्होंने लिखा है कि यदि कोई नेता पार्टी हित में मुद्दों को सार्वजनिक करता है, तो उसे पार्टी विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के खिलाफ जाने वालों को संगठन में बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
वित्त मंत्री ने प्रदेश नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए नई प्रदेश कमेटी में 314 सदस्यों को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि 628 लोगों की भी कमेटी बना दी जाए तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि केवल संख्या बढ़ाने से संगठन मजबूत नहीं होता, बल्कि स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता जरूरी है।
उन्होंने इशारों में प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “एक को साधिए, सभी सध जाएंगे”, जिसे राजनीतिक हलकों में सीधे नेतृत्व पर हमला माना जा रहा है।राधाकृष्ण किशोर ने कई अहम मुद्दों को उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्रभावी तरीके से जनता के बीच नहीं ले जाया गया। केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से महिलाओं के बीच सही संदेश नहीं पहुंच सकता।
इसके अलावा उन्होंने झारखंड में मगही और भोजपुरी भाषाओं को जेटेट परीक्षा से हटाए जाने के मुद्दे पर भी प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों में इन भाषाओं का व्यापक उपयोग होता है, फिर भी इस विषय पर पार्टी ने कोई ठोस रुख नहीं अपनाया।उन्होंने अनुसूचित जाति से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
उनका कहना था कि राज्य में लगभग 50 लाख अनुसूचित जाति की आबादी है, लेकिन अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और आयोग को पुनर्जीवित करने की उनकी मांग पर प्रदेश नेतृत्व मौन रहा।इसके साथ ही उन्होंने कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया, जिनमें हजारीबाग में नाबालिग से दुष्कर्म और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या की घटनाएं शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन गंभीर मामलों में प्रदेश कांग्रेस की सक्रियता नहीं दिखी।पार्टी के अंदरखाने भी हलचल तेज है। सूत्रों के मुताबिक, कई आदिवासी विधायक और नेता प्रदेश नेतृत्व से नाराज हैं और बड़े पैमाने पर इस्तीफे की तैयारी चल रही है। इनमें नवगठित कमेटी के कुछ सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं।







