रांची: …और शिक्षिका की बर्खास्तगी को हाईकोर्ट ने कर दिया रद्द, फैसले में कहा, समान डिग्री वालों के साथ नहीं किया जा सकता भेदभाव
Ranchi: ...and the High Court cancelled the dismissal of the teacher, saying in the decision that those with the same degree cannot be discriminated against.

रांची/25.5.26। झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षिका की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। शिक्षिका की डिग्री में भेदभाव को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि एक ही संस्थान से प्राप्त समान डिग्री धारकों के साथ केवल अंकों के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने शिक्षा विभाग के नियम को मनमाना बताते हुए संगीत शिक्षिका सुचरिता महतो की सेवा बहाल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने शिक्षा विभाग के उस नियम को मनमाना और असंवैधानिक करार दिया, जिसके तहत 2007 से पहले 300 अंकों की संगीत प्रभाकर डिग्री प्राप्त करने वालों को नियुक्ति के लिए अयोग्य माना गया था।जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने बोकारो निवासी संगीत शिक्षिका सुचरिता महतो की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि सुचरिता महतो को आठ सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभों के साथ सेवा में बहाल किया जाए।
बर्खास्तगी के खिलाफ पहुंचीं हाईकोर्ट
शिक्षिका सुचरिता महतो ने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से वर्ष 1985 और 1989 में संगीत प्रभाकर की डिग्री हासिल की थी। वर्ष 2011 में निकले विज्ञापन के आधार पर उनकी नियुक्ति गिरिडीह जिले में संगीत शिक्षिका के पद पर हुई थी।कई वर्षों तक सेवा देने के बाद 31 जुलाई 2020 को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उनकी सेवा समाप्त कर दी। विभाग का कहना था कि उनकी डिग्री सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। इस फैसले के बाद सुचरिता महतो ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
300 और 500 अंकों की डिग्री बना विवाद की वजह
विवाद तब बढ़ा जब शिक्षा विभाग ने 14 सितंबर 2022 को एक संकल्प जारी किया। इस संकल्प में प्रयाग संगीत समिति की 500 अंकों वाली संगीत प्रभाकर डिग्री को स्नातक के समकक्ष मान्यता दे दी गई, लेकिन 2007 से पहले की 300 अंकों वाली डिग्री रखने वालों को इस दायरे से बाहर कर दिया गया।याचिकाकर्ता का तर्क था कि उन्होंने उसी संस्थान से डिग्री प्राप्त की है, जिससे अन्य उम्मीदवारों ने की थी। केवल अंकों के अंतर के आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराना अनुचित है। उन्होंने अदालत से इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया।
कोर्ट ने नियम को बताया मनमाना
हाईकोर्ट ने माना कि एक ही संस्थान से प्राप्त समान प्रकृति की डिग्री के आधार पर उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने कहा कि केवल 300 और 500 अंकों के आधार पर डिग्री धारकों को अलग श्रेणी में रखना तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने शिक्षा विभाग के नियम को मनमाना और अमान्य करार देते हुए कहा कि इससे समान अवसर और समानता के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन होता है।
सभी लाभों के साथ बहाली का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सुचरिता महतो की सेवा समाप्त करना उचित नहीं था। अदालत ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि उन्हें आठ सप्ताह के भीतर सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही वेतन, सेवा निरंतरता और अन्य सभी परिणामी लाभ भी प्रदान किए जाएं।







