रांची: ‘गद्दारी’ किसने की? ना राजद…ना माले, तो फिर शक किसकी ओर ? कहीं अपनों ने ही तो दगा नहीं दिया? पढ़िये सियासी सस्पेंस की कहानी
Jharkhand Rajya Sabha Election, Cross Voting Jharkhand, Congress vs RJD Jharkhand, JMM Alliance विवाद, Jharkhand Political Crisis, Pranav Jha Defeat, Parimal Nathwani जीत, Jharkhand Alliance Conflict झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस, राजद और माले में आरोप-प्रत्यारोप तेज। क्रॉस वोटिंग को लेकर गठबंधन में बढ़ी खटास, जानिए पूरा मामला।
रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे सामने आते ही महागठबंधन की दरार खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद अब सवालों का दौर शुरू हो गया है—आखिर क्रॉस वोटिंग किसने की? कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने साफ आरोप लगाया है कि राजद और माले ने गठबंधन के साथ ‘धोखा’ किया।
उनका कहना है कि अगर सभी सहयोगी दल एकजुट रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था। लेकिन इन आरोपों को राजद और माले दोनों ने सिरे से खारिज कर दिया है। ऐसे में तो सिर्फ झामुमो बचती है या फिर खुद कांग्रेस? जाहिर है कांग्रेस को ये भी पड़ताल करनी चाहिये, कि कहीं अपनों से ही तो दगा नहीं मिला…अगर ऐसा नहीं, तो फिर शक का पूरा ठिकरा झामुमों पर ही जाने वाला है।
राजद-माले का पलटवार: “पहले अपने घर को संभालें”
हालांकि कांग्रेस के आरोपों पर राजद और माले नेताओं ने कांग्रेस पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। माले विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने पूरी ईमानदारी से गठबंधन के निर्देशों का पालन किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में बड़े दलों पर आरोप लगाने की हिम्मत नहीं है, इसलिए छोटे दलों को निशाना बनाया जा रहा है।माले विधायक चंद्रदेव महतो ने भी दो टूक कहा कि कांग्रेस अपने ही विधायकों को ‘इंटैक्ट’ नहीं रख सकी। बिना तथ्य के आरोप लगाना राजनीतिक कमजोरी को दर्शाता है।
राजद का तीखा हमला: “झोला भरकर जाते हैं”
राजद विधायक संजय प्रसाद यादव ने तो कांग्रेस प्रभारी के. राजू पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने कहा कि “जब भी के. राजू झारखंड आते हैं, झोला भरकर जाते हैं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी है और क्रॉस वोटिंग उसी का नतीजा हो सकती है।संजय सिंह यादव ने भी कहा कि राजद एक संघर्षशील पार्टी है, ‘बिकाऊ’ नहीं। उन्होंने दावा किया कि उनके विधायकों ने पूरी निष्ठा से गठबंधन के पक्ष में वोट किया।
दीपिका पांडेय ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक व मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी सहयोगी दलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि महागठबंधन की मजबूती पर अब संदेह पैदा हो गया है। उनके बयान से यह साफ हो गया कि कांग्रेस के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
81 सदस्यीय विधानसभा में महागठबंधन के पास 56 विधायक थे। बावजूद इसके कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। झामुमो के बैजनाथ राम को 31 वोट मिले, जबकि निर्दलीय परिमल नथवानी को 28 वैध वोट हासिल हुए। कांग्रेस उम्मीदवार केवल 19 वोटों पर सिमट गए।तीन वोटों का रद्द होना भी इस पूरे चुनाव को और संदिग्ध बना देता है।
सबसे बड़ा सवाल: वोट आया कहां से?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर राजद और माले ने क्रॉस वोटिंग नहीं की, तो फिर अतिरिक्त वोट आया कहां से?
क्या यह कांग्रेस के भीतर की गड़बड़ी है?
या फिर गठबंधन के किसी और हिस्से में ‘खेल’ हुआ?
या फिर पूरी कहानी अभी सामने आना बाकी है?
गठबंधन में दरार गहराई
राज्यसभा चुनाव ने झारखंड की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। महागठबंधन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं और आने वाले समय में इसका असर सरकार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।फिलहाल सियासत में एक ही चर्चा है— “गद्दारी किसने की?”









