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25 साल बाद भी अधूरा बंटवारा: बिहार-झारखंड में संपत्ति-पेंशन और जल विवाद सुलझेगा, पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक 7 जुलाई को

भुवनेश्वर में 7 जुलाई को होने वाली पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में बिहार-झारखंड के बीच 25 साल पुराने विवाद फिर उठेंगे। संपत्ति, पेंशन, जल विवाद समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी।भुवनेश्वर में होने वाली बैठक में जल विवाद, संपत्ति, पेंशन और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर होगी चर्चा

रांची: झारखंड को बिहार से अलग होकर राज्य बने 25 साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दोनों राज्यों के बीच कार्य और दायित्वों का बंटवारा आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। अब यह मामला एक बार फिर 7 जुलाई को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में होने वाली पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठने जा रहा है। झारखंड में इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू हो गयी है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड और बिहार के बीच लंबित मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें अंतरराज्यीय जल विवाद, सीमा सुरक्षा, संपत्ति का बंटवारा, पेंशन मामलों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था जैसे अहम विषय शामिल हैं। भले ही झारखंड बने दो दशक से अधिक समय गुजर गया हो, लेकिन बिहार-झारखंड के बीच कई बुनियादी विवाद अब भी जटिल बने हुए हैं। ऐसे में 7 जुलाई की यह बैठक इन मुद्दों के समाधान की दिशा में एक और अहम कोशिश मानी जा रही है।

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झारखंड ने शुरू की तैयारी

इधर, बैठक को लेकर झारखंड सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों की समीक्षा की है। विभाग स्तर पर उन बिंदुओं को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्हें परिषद की बैठक में मजबूती से उठाया जाएगा।

चार राज्यों के CM होंगे शामिल

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की इस बैठक में

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  • झारखंड
  • बिहार
  • पश्चिम बंगाल
  • ओडिशा के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। यह मंच राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने और आपसी समन्वय को मजबूत करने के लिए अहम माना जाता है।

पहले भी सुलझे हैं कई मामले

पूर्व में भी इस परिषद की बैठकों के जरिए बिहार और झारखंड के बीच दर्जनों विवादित मामलों का समाधान किया जा चुका है। हालांकि अब भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे ऐसे हैं, जो वर्षों से लंबित हैं और उनके समाधान का इंतजार किया जा रहा है।

अभी भी क्यों अटका है मामला?

राज्य विभाजन के बाद

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  • परिसंपत्तियों का बंटवारा
  • कर्मचारियों की पेंशन
  • जल संसाधनों का उपयोग
  • सीमा से जुड़े प्रशासनिक मुद्दे जैसे कई विषयों पर स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है। यही कारण है कि हर बैठक में ये मुद्दे दोबारा उठते हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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