झारखंड: 17 साल नौकरी करने वाले कर्मचारी को चाय-बिस्कुट के आरोप में किया बर्खास्त, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार; बहाली व 50% बकाया वेतन का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने डीआरडीए बोकारो के संविदा चपरासी रंजीत कुमार हिमांशु की बर्खास्तगी रद्द कर बहाली और 50% बकाया वेतन देने का आदेश दिया। कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को असंवेदनशील बताया।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारी की बर्खास्तगी को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए), बोकारो में कार्यरत रंजीत कुमार हिमांशु की बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया।
अदालत ने उन्हें 1 जुलाई 2026 तक सेवा में बहाल करने और चार वर्षों का 50 प्रतिशत बकाया वेतन 31 जुलाई 2026 तक भुगतान करने का निर्देश दिया है।हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रशासन के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “दया के साथ किया गया न्याय नहीं, बल्कि असंवेदनशीलता से भरा अन्याय” का उदाहरण है।
17 साल की सेवा के बाद नौकरी से बर्खास्त
रंजीत कुमार हिमांशु की नियुक्ति 31 दिसंबर 2005 को डीआरडीए, बोकारो में संविदा चपरासी के रूप में हुई थी। लगभग 17 वर्षों तक सेवा देने के बाद 16 मार्च 2022 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में आरोप लगाया गया कि कार्यालय से कुछ सामान उनके घर ले जाया गया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि वह सामान क्या था।बाद में सामने आया कि मामला चायपत्ती और बिस्कुट से जुड़ा था।इसके बाद 2 मई 2022 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने पहले एकलपीठ और बाद में खंडपीठ में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने प्रशासन पर जताई नाराजगी
खंडपीठ ने कहा कि अस्पष्ट कारण बताओ नोटिस जारी करना, बिना नोटिस दिए कार्रवाई करने के समान है।अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन ने रंजीत के 17 वर्षों के बेदाग सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए उत्कृष्ट कार्य प्रमाणपत्रों की पूरी तरह अनदेखी की।कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि यह मान भी लिया जाए कि कर्मचारी चाय और बिस्कुट घर ले गया था, तब भी इतनी लंबी सेवा के बाद सीधे नौकरी से निकाल देना पूरी तरह असंगत और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान रंजीत ने अदालत को बताया कि उनकी आय पर उनकी पत्नी, तीन बेटियां और छोटी बहन सहित छह सदस्यीय परिवार निर्भर है।हाईकोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी का आदेश पारित करते समय प्रशासन ने कर्मचारी की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर कोई विचार नहीं किया।कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक गरीब चपरासी पिछले चार वर्षों से नौकरी से बाहर है और उसके परिवार पर इसका गंभीर असर पड़ा होगा।
बहाली और बकाया वेतन का आदेश
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि—
• रंजीत कुमार हिमांशु को 1 जुलाई 2026 तक सेवा में बहाल किया जाए।
• 31 जुलाई 2026 तक चार वर्षों का 50 प्रतिशत बकाया वेतन दिया जाए।
• शेष 50 प्रतिशत वेतन की कटौती को ही उनकी कथित गलती के लिए पर्याप्त दंड माना जाए।
अधिकारियों को भी दिए निर्देश
अदालत ने उपायुक्त, बोकारो और उप विकास आयुक्त (डीडीसी), बोकारो को व्यक्तिगत रूप से आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
साथ ही निर्देश दिया गया कि—
• 10 जुलाई 2026 तक बहाली संबंधी अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया जाए।
• 10 अगस्त 2026 तक बकाया वेतन भुगतान का अनुपालन शपथपत्र हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाए।









