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झारखंड: वाह गुरुजी! ज्वाइनिंग लेटर के पहले मिल गया रिटायरमेंट आर्डर, झारखंड में सहायक आचार्य भर्ती पर उठे सवाल, कई शिक्षक 4-6 महीने में हो जायेंगे रिटायर

24 साल पारा शिक्षक रहे, रिटायर होने के बाद मिला सहायक आचार्य का नियुक्ति पत्र, झारखंड भर्ती पर उठे सवाल,झारखंड में 1042 सहायक आचार्यों की नियुक्ति के बीच कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। 24 साल पारा शिक्षक रहे मोहम्मद नईम अंसारी को रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति पत्र मिला, जबकि कई शिक्षक कुछ महीनों में रिटायर होंगे।

रांची। झारखंड सरकार ने सोमवार को 1,042 नव चयनित इंटर स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे, लेकिन इस नियुक्ति समारोह के बाद कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई ऐसे पारा शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिला है जो पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कई शिक्षक अगले कुछ महीनों में रिटायर होने वाले हैं।

रिटायरमेंट के बाद मिला नियुक्ति पत्र

सबसे चर्चित मामला पलामू जिले के मोहम्मद नईम अंसारी का है। वह 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्हें अब सहायक आचार्य का नियुक्ति पत्र दिया गया है।मोहम्मद नईम अंसारी ने करीब 24 वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2013 से वे नियमित नियुक्ति के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन जब नियुक्ति मिली तब तक वे रिटायर हो चुके थे।

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कुछ महीनों में रिटायर होंगे कई नए सहायक आचार्य

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी स्थिति बनी हो। इससे पहले मई 2026 में वितरित नियुक्ति पत्रों के दौरान भी कई ऐसे अभ्यर्थी सामने आए थे, जिनकी सेवा अवधि महज कुछ महीने या एक वर्ष से भी कम बची थी।सोमवार को नियुक्ति पत्र पाने वाले कई सहायक आचार्य ऐसे हैं जो अगले छह से आठ महीनों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। कुछ की सेवा अवधि एक साल से भी कम बची है।

50 फीसदी आरक्षण के कारण बनी स्थिति

दरअसल, सहायक आचार्य भर्ती में पारा शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए थे। इसके अलावा उन्हें आयु सीमा में भी विशेष छूट दी गई थी।इसी कारण लंबे समय से पारा शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे कई शिक्षक अपने सेवाकाल के अंतिम चरण में सहायक आचार्य के पद पर चयनित हुए।हालांकि इसी भर्ती में कई ऐसे पारा शिक्षक भी शामिल हैं जिनकी सेवा अवधि अभी 8 से 12 वर्ष तक शेष है।

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खुशी भी, गम भी

नियुक्ति पत्र पाने वाले कई शिक्षकों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि उनके लिए यह पल खुशी और पीड़ा दोनों लेकर आया है।शिक्षकों का कहना है कि नियमित शिक्षक बनने का सपना तो पूरा हुआ, लेकिन अब सेवा देने के लिए बहुत कम समय बचा है।एक शिक्षक ने कहा, “सहायक आचार्य बनने की खुशी जरूर है, लेकिन अफसोस है कि कुछ ही महीनों बाद रिटायर होना पड़ेगा।”

‘वेतन भी समय पर मिल पाएगा या नहीं, पता नहीं’

कुछ शिक्षकों ने चिंता जताई कि जिनकी सेवा अवधि छह महीने बची है, उन्हें नियमित वेतन भी समय पर मिल पाएगा या नहीं।उनका कहना है कि सरकारी प्रक्रिया में पीएफ खाता खुलने सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी होने में ही कई महीने लग जाते हैं।

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समय पर परीक्षा होती तो कई साल मिलती सेवा

नवनियुक्त शिक्षकों का कहना है कि यदि JTET परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी होती, तो उन्हें 5 से 10 वर्ष तक नियमित शिक्षक के रूप में काम करने का अवसर मिलता।शिक्षकों के मुताबिक, जेटेट उत्तीर्ण करने के बावजूद वर्षों तक नियुक्ति नहीं मिली, जिसके कारण उनके नियमित सेवा के अवसर सीमित हो गए।

अब इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब चयन प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रही, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं शिक्षकों को हुआ, जिन्होंने दशकों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवा दी।जहां सरकार इसे बड़ी नियुक्ति बताकर उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं रिटायरमेंट के बाद या कुछ महीने पहले नियुक्ति मिलने की घटनाएं भर्ती प्रक्रिया में हुई देरी की ओर भी इशारा कर रही हैं।
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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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