JPSC-JSSC धांधली: 2 करोड़ की डील का अब खुलेगा राज, चेयरमैन एल. खियांग्ते तक कैसे पहुंचा पैसा, CID अरुण शर्मा करेगी पूछताछ
JPSC-JSSC धांधली मामले में 2 करोड़ रुपये की कथित डील जांच के घेरे में है। CID रिमांड पर अरुण शर्मा से पूछताछ कर एल. खियांग्ते से जुड़े कथित लेन-देन का राज खंगालेगी।

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC से जुड़े कथित धांधली और पेपर लीक मामलों की जांच के बीच अब 2 करोड़ रुपये की कथित डील जांच एजेंसियों के रडार पर है। बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा को CID ने पांच दिनों की रिमांड पर लिया है। अब CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम उससे पूछताछ कर कथित लेन-देन की पूरी कड़ी खंगालेगी। माना जा रहा है कि चेयरमैन एल खिंग्याते ने कहां और किस तरह से 2 करोड़ की रकम ली, इसका पता जांच एजेंसी लगायेगी।
जांच एजेंसी की पूछताछ का सबसे अहम बिंदु यह है कि कथित 2 करोड़ रुपये कहां और कैसे दिए गए और इस रकम के बदले किस तरह का काम कराने की बात तय हुई थी। प्रारंभिक पूछताछ में अरुण शर्मा के हवाले से यह बात सामने आई है कि JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के साथ काम के बदले दो करोड़ रुपये और प्रत्येक भुगतान पर 20 प्रतिशत कमीशन की कथित डील तय हुई थी।
2 करोड़ की डील का राज तलाशेगी CID
अरुण शर्मा से अब CID यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर तय की गई दो करोड़ रुपये की रकम का भुगतान कब, कहां और किस माध्यम से किया गया। जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि इस कथित डील के बाद JPSC में किस तरह के काम कराए गए और उनसे कितनी अवैध कमाई होने का आरोप है।पूछताछ में सामने आने वाले बयानों की पुष्टि के लिए CID संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने की भी कोशिश करेगी।
धर्मेंद्र के जरिए हुई थी कथित डील?
जांच का एक अहम सिरा धर्मेंद्र कुमार से भी जुड़ा है। CID अरुण शर्मा से यह पूछेगी कि एल. खियांग्ते से उसकी कथित डील कराने वाले धर्मेंद्र से उसकी मुलाकात कैसे हुई थी।वहीं, CID धर्मेंद्र से भी लगातार पूछताछ कर रही है। पूछताछ में धर्मेंद्र के कथित तौर पर एल. खियांग्ते के करीबी होने और कंपनियों तथा एजेंसियों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाने से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
एल. खियांग्ते के करीबी कर्मचारी के रूप में काम करने का दावा
CID की पूछताछ में धर्मेंद्र कुमार ने कथित तौर पर बताया है कि जब एल. खियांग्ते झारखंड सरकार के मुख्य सचिव थे, उसी दौरान उसने उनका विश्वास हासिल किया था। इसके बाद वह उनका विश्वासी कर्मचारी बन गया।
जांच के अनुसार, धर्मेंद्र कथित तौर पर कंपनियों और एजेंसियों से जुड़े लेन-देन और डील में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। अब CID यह पता लगाने में जुटी है कि उसके जरिए कितनी कथित डील फाइनल हुईं और उनमें कितना लेन-देन हुआ।
JSSC पेपर लीक केस में भी अरुण शर्मा से पूछताछ
अरुण शर्मा की गिरफ्तारी का एक प्रमुख कनेक्शन JSSC कनीय अभियंता (डिप्लोमा) परीक्षा के पेपर लीक मामले से है। रांची के नामकुम थाने में इस मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।जांच के दौरान परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी बिंसिस टेक्नोलॉजी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
रांची पुलिस ने अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा को मुंबई से गिरफ्तार किया था और रांची लाया गया।अब वह पांच दिनों की रिमांड पर है। इस दौरान रांची पुलिस JSSC पेपर लीक मामले से जुड़े सवाल करेगी, जबकि CID JPSC से जुड़े कथित लेन-देन और अन्य आरोपों पर पूछताछ करेगी।
जांच में अब सामने आएंगी कथित लेन-देन की कड़ियां
पूरे मामले में CID के सामने सबसे बड़ा सवाल कथित 2 करोड़ रुपये की डील को लेकर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम का भुगतान वास्तव में हुआ या नहीं, यदि हुआ तो किस माध्यम से हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।अरुण शर्मा और धर्मेंद्र से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसी कथित लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। हालांकि, पूछताछ में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।











