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रांची: नीलामी में खरीदी संपत्ति पर पुराने मालिक का बिजली बिल नहीं वसूला जा सकता, झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंक की ई-नीलामी से खरीदी गई संपत्ति पर पुराने उपभोक्ता का बिजली बकाया नए खरीदार से नहीं वसूला जा सकता। DVC के करोड़ों रुपये के मांग पत्र को कोर्ट ने रद्द कर दिया।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने संपत्ति खरीदने वाले नए खरीदारों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि नीलामी के जरिए खरीदी गई संपत्ति पर पुराने मालिक का बिजली बकाया नए खरीदार से नहीं वसूला जा सकता। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) की ओर से जारी करोड़ों रुपये की बकाया मांग को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी व्यक्ति या कंपनी ने बैंक की ई-नीलामी या वैधानिक प्रक्रिया के तहत संपत्ति खरीदी है और उसका पूर्व उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं है, तो उस पर पुराने बिजली बिल की देनदारी नहीं थोपी जा सकती। हाईकोर्ट का ये फैसला कई लोगों के लिए बड़ी राहत की बात हो सकती है।

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जानिये क्या है पूरा मामला?

यह मामला मंगलम स्टील और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) के बीच का है। मंगलम स्टील ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ई-नीलामी के माध्यम से मैसर्स श्री हनुमान एलायज प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति खरीदी थी।

संपत्ति खरीदने के बाद कंपनी ने नए बिजली कनेक्शन के लिए डीवीसी में आवेदन किया, लेकिन डीवीसी ने कनेक्शन देने से पहले पूर्व उपभोक्ता का करीब 4.92 करोड़ रुपये का बकाया जमा करने की शर्त रख दी। बाद में संशोधित टैरिफ के आधार पर 1.34 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग भी की गई।

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अंतरिम आदेश के बाद मिला था बिजली कनेक्शन

मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर अदालत के अंतरिम आदेश के तहत मंगलम स्टील ने किस्तों में राशि जमा की, जिसके बाद उसे बिजली कनेक्शन दिया गया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द कर दी करोड़ों की मांग?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग (JSERC) की बिजली आपूर्ति संहिता, 2015 का हवाला देते हुए कहा कि नया खरीदार तभी पुराने बकाये के लिए जिम्मेदार होगा, जब उसका पूर्व उपभोक्ता से कोई कानूनी या व्यावसायिक संबंध हो।चूंकि मंगलम स्टील ने संपत्ति बैंक की ई-नीलामी के जरिए खरीदी थी और उसका पुराने उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं था, इसलिए उस पर करोड़ों रुपये का बिजली बकाया डालना कानून के अनुरूप नहीं है।

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डीवीसी के मांग पत्र रद्द

हाईकोर्ट ने डीवीसी द्वारा जारी दोनों मांग पत्रों को रद्द करते हुए कहा कि पूर्व उपभोक्ता का बकाया उसी से वसूला जा सकता है। किसी नए खरीदार को केवल इसलिए भुगतान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने नीलामी में संपत्ति खरीदी है।

जमा की गई राशि पर भी मिलेगा कानून के अनुसार लाभ

अदालत ने डीवीसी को यह भी निर्देश दिया कि अंतरिम आदेश के दौरान मंगलम स्टील द्वारा जमा कराई गई राशि के संबंध में भी कानून के अनुसार उचित राहत दी जाए।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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