झारखंड न्यूज : सिविल सर्जन की मुश्किलें बढ़ी, लड़की मेडिकल जांच के लिए हुई राजी, सदर अस्पताल में 5 घंटे तक चली मेडिकल जांच

कोडरमा। झारखंड के कोडरमा में आदिवासी नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले में बुधवार को नया घटनाक्रम सामने आया, जब दो दिन पहले मेडिकल जांच कराने से इनकार करने वाली पीड़िता सदर अस्पताल पहुंची। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम ने करीब पांच घंटे तक उसकी चिकित्सकीय जांच की। हालांकि, जांच में क्या सामने आया है, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस मामले में शिकायत, पीड़िता के बयान, मेडिकल जांच और अन्य संभावित साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
पुलिस की मौजूदगी में सदर अस्पताल पहुंची पीड़िता
जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर बाद महिला थाना प्रभारी सह मामले की अनुसंधानकर्ता हेमा कुमारी पुलिस बल के साथ पीड़िता को लेकर सदर अस्पताल पहुंचीं। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आवश्यक चिकित्सकीय जांच की प्रक्रिया पूरी की।
बताया जा रहा है कि मेडिकल जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई थी। इसमें दो महिला रोग विशेषज्ञ, एक दंत चिकित्सक, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के एक रेडियोलॉजिस्ट को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच की प्रक्रिया करीब पांच घंटे तक चली। हालांकि, मेडिकल जांच से संबंधित निष्कर्षों को लेकर अस्पताल प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच के नतीजों के बारे में फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
पहले मेडिकल जांच से किया था इनकार, फिर हुई तैयार
इस मामले में पीड़िता की मेडिकल जांच को लेकर पहले भी घटनाक्रम सामने आया था। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने दो दिन पहले जांच कराने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे थे।
बुधवार को पीड़िता के सदर अस्पताल पहुंचने और मेडिकल जांच कराए जाने के बाद मामले में नया घटनाक्रम सामने आया। सूत्रों के अनुसार, गांव स्तर पर पहल किए जाने के बाद पीड़िता और उसके परिजन जांच कराने के लिए तैयार हुए।
हालांकि, पहले मेडिकल जांच से इनकार करने और बाद में सहमति देने के पीछे क्या कारण रहे, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
पीड़िता ने सिविल सर्जन पर लगाए गंभीर आरोप
मामले में पीड़िता हजारीबाग जिले के विशुनगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई गई है। उसने अपने आवेदन और बाल कल्याण समिति (CWC), हजारीबाग के समक्ष दिए गए बयान में सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
शिकायत के मुताबिक, पीड़िता ने आरोप लगाया कि करीब दो महीने की अवधि में उसके साथ तीन बार यौन शोषण किया गया। शिकायत के आधार पर महिला थाना में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन को गिरफ्तार किया।
मामला एक नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस जांच के साथ-साथ पीड़िता की सुरक्षा और गोपनीयता भी महत्वपूर्ण है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य होने का किया था दावा
इस मामले में पुलिस पहले ही पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध होने का दावा कर चुकी है। अब पीड़िता की मेडिकल जांच पूरी होने के बाद जांच एजेंसी के लिए शिकायत, बयान, चिकित्सकीय निष्कर्ष और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करना महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच क्या संबंध है। जांच में सामने आने वाली जानकारियां आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अहम हो सकती हैं।
बुधवार को अस्पताल पहुंचने के दौरान पीड़िता की ओर से आरोपी के खिलाफ कुछ और गंभीर आरोप लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इन अतिरिक्त आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।
मेडिकल जांच के बाद अब आगे क्या?
पीड़िता की मेडिकल जांच पूरी होने के बाद अब मामले में चिकित्सकीय निष्कर्षों और अन्य साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों, पीड़िता के बयान और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों का समग्र परीक्षण करना होगा।
फिलहाल मेडिकल जांच के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
कोडरमा के इस मामले पर अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और आधिकारिक जानकारी पर है। चूंकि मामला नाबालिग से संबंधित है, इसलिए जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने तक तथ्यों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।












