JPSC Exam Scam: खाली छोड़े OMR शीट पर भी बंपर नंबर, रिजल्ट से पहले 267 अभ्यर्थियों का डेटा लीक! OMR में हेराफेरी से लेकर WhatsApp चैट तक, CID की चार्जशीट में बड़े खुलासे
14वीं JPSC परीक्षा की CID जांच में WhatsApp पर 267 चयनित अभ्यर्थियों का डेटा साझा करने, OMR शीट में कथित हेराफेरी और कॉल रिकॉर्ड से जुड़े खुलासे सामने आए।

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, एक से बढ़कर एक गड़बड़ी सामने आ रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि कोरी छोड़ी गयी OMR Sheet पर भी बंपर नंबर दिये गये। यही नहीं कई जानकारियां भी लीक की गयी।
CID स्पेशल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने, OMR शीट में कथित हेराफेरी और संदिग्ध फोन कॉल को लेकर साक्ष्यों का उल्लेख किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले ही 267 चयनित अभ्यर्थियों का डेटा WhatsApp पर साझा किया गया था। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, अभ्यर्थियों की OMR शीट और कार्बन कॉपी के मिलान में भी कथित विसंगतियां सामने आई हैं।
इन खुलासों के बाद परीक्षा की निष्पक्षता और परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जांच में सामने आए आरोपों और अदालत में दोष सिद्ध होने के बीच अंतर करना जरूरी है। मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
रिजल्ट जारी होने से पहले WhatsApp पर साझा हुआ 267 अभ्यर्थियों का डेटा
CID की तरफ से दायर की गयी चार्जशीट के अनुसार, JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के कर्मचारी उस्मान के बीच WhatsApp पर परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ था।
दावा है कि इस बातचीत के माध्यम से 267 चयनित अभ्यर्थियों का डेटा साझा किया गया। इनमें दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी शामिल थे। चार्जशीट में दिए गए विवरण के अनुसार, बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों में बिहार के 146, उत्तर प्रदेश के 82 और हरियाणा के 14 उम्मीदवार शामिल थे।
CID ने यह भी बताया है कि दोनों के बीच परीक्षा से संबंधित प्रश्न और उत्तर, OMR शीट के पुनर्मूल्यांकन, अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक तथा श्रेणीवार और कोटिवार चयनित उम्मीदवारों की संख्या से जुड़ी जानकारियां साझा किए जाने के साक्ष्य मिले हैं।जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कथित रूप से लीक हुई जानकारी किन अन्य लोगों तक पहुंची और इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका थी।
CCTV फुटेज और OMR शीट के मिलान में मिली कथित गड़बड़ियां
इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज और अभ्यर्थियों की OMR शीट का मिलान है। CID के अनुसार, कुछ सफल अभ्यर्थियों के परीक्षा के दौरान के व्यवहार और उनकी OMR शीट पर दर्ज उत्तरों के बीच अंतर पाया गया है।
ओम प्रकाश राणा के मामले में उठे सवाल
जांच के मुताबिक, सफल अभ्यर्थी ओम प्रकाश राणा परीक्षा के दौरान CCTV फुटेज में सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए। वहीं, उनकी दोनों पेपर की OMR शीट में क्रमशः 91 और 92 सही उत्तर दर्ज होने का उल्लेख है।जांच एजेंसी इन तथ्यों के आधार पर परीक्षा के दौरान उनके प्रदर्शन और OMR शीट में दर्ज उत्तरों के बीच कथित विसंगति की पड़ताल कर रही है।
वंदना कुमारी की OMR शीट की जांच
वंदना कुमारी के मामले में भी CCTV फुटेज और OMR शीट के बीच अंतर होने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार, उन्होंने दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न हल किए थे, जबकि OMR शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज पाए गए।इन तथ्यों को जांच एजेंसी संभावित अनियमितता के संदर्भ में देख रही है। मामले में संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
खाली OMR शीट के बावजूद 292 अंक मिलने का आरोप
अरविंद कुमार का मामला भी जांच के दायरे में है। CID के अनुसार, CCTV फुटेज में वह परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए। जांच में उनकी OMR शीट पर कोई गोला भरा हुआ नहीं मिलने के बावजूद 292 अंक मिलने का दावा किया गया है।
यह भी आरोप है कि पूछताछ के दौरान अरविंद ने OMR शीट खाली छोड़ने और उसकी कार्बन कॉपी जलाने की बात स्वीकार की। इन तथ्यों की जांच के आधार पर एजेंसी संभावित हेराफेरी की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
कार्बन कॉपी और मूल OMR शीट में भी अंतर
जांच में वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा के सफल अभ्यर्थी रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी और मूल OMR शीट के बीच भी कथित अंतर सामने आया है।उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनकी कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज थे, जबकि मूल OMR शीट में 147 उत्तर मिलने की बात कही गई है।
इसके अतिरिक्त, एक मोबाइल वीडियो में मूल प्रति स्ट्रांग रूम के बाहर परीक्षा एजेंसी से जुड़े कर्मियों के पास दिखाई देने का दावा भी किया गया है।CID इन दस्तावेजों और वीडियो के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि OMR शीट की स्कैनिंग, भंडारण और प्रसंस्करण के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।
स्कैनिंग सेंटर पर CCTV निगरानी को लेकर भी सवाल
चार्जशीट में OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग से जुड़े स्थानों पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ स्थानों पर CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे या पर्याप्त निगरानी उपलब्ध नहीं थी।इससे दस्तावेजों की सुरक्षा और उनके प्रसंस्करण की प्रक्रिया पर संदेह पैदा हुआ है। CID परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL की भूमिका समेत पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
WhatsApp और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से क्या सामने आया?
CID ने चार्जशीट में कई व्यक्तियों के बीच हुई फोन बातचीत के विवरण का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर अलग-अलग अवधि में हुई बातचीत की संख्या अदालत के सामने रखी है।
• श्वेता कुमारी गुप्ता और सोनू कुमार: 14 अगस्त 2024 से 18 जुलाई 2026 के बीच 635 बार बातचीत होने का उल्लेख है।
• सोनू कुमार और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक सह सचिव: 10 मई 2025 से 9 जुलाई 2026 के बीच 119 बार बातचीत दर्ज होने की बात कही गई है।
• सोनू कुमार और ब्रज कुमार राम: 4 सितंबर 2024 से 28 जनवरी 2026 के बीच 83 बार बातचीत का विवरण दिया गया है।
• श्वेता कुमारी गुप्ता और उस्मान: 17 जून 2025 से 21 जुलाई 2026 के बीच 674 बार बातचीत होने का उल्लेख है।
• श्वेता कुमारी गुप्ता और तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते: 7 जून 2025 से 15 जुलाई 2026 के बीच 301 से 304 बार बातचीत होने का विवरण चार्जशीट में दिया गया है।
• TDPL के अन्य कर्मचारियों से संपर्क: स्कैनिंग प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह और हेमंत वर्मा समेत अन्य व्यक्तियों के कॉल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी व्यक्ति के साथ कई बार फोन पर बातचीत होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। CID इन संपर्कों को अन्य दस्तावेजों, चैट और कथित अनियमितताओं के साथ जोड़कर उनकी प्रासंगिकता की जांच कर रही है।
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते और अन्य लोगों की भूमिका की जांच
चार्जशीट में JPSC के वर्तमान सचिव के निजी सहायक अरुण कुमार के बयान का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कार्यकाल में परीक्षा संचालन के दौरान नियमों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया है।
बयान में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और गोपनीय शाखा से जुड़े कर्मचारी सोनू कुमार की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं।इसके अतिरिक्त, परीक्षा संचालन एजेंसी बिंसिस को काम दिलाने के लिए कथित तौर पर 2.50 लाख रुपये नकद पहुंचाए जाने का आरोप भी चार्जशीट में उल्लिखित है।
इस मामले में ब्रज कुमार राम की भूमिका की जांच की जा रही है।ये आरोप जांच के दौरान दर्ज बयानों और एकत्र किए गए साक्ष्यों पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों का अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।












