निजी अस्पताल के मनमानी पर रोक : अस्पतालों में अब रेट चार्ट लगाना अनिवार्य, 7 दिनों की मोहलत; डॉक्टरों की डिग्री से लेकर जांच शुल्क तक की जानकारी करनी होगी सार्वजनिक
Ranchi Hospital Rate Chart: निजी अस्पतालों में रेट चार्ट अनिवार्य, इलाज के नाम पर मनमानी पर लगी रोक

रांची: झारखंड में अब अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी।लगातार अस्पतालों को पैसे कदमदने का अड्डा बनाने की शिकायत को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब अलर्ट हो गया है। राजधानी रांची में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों में इलाज के नाम पर मनमाने शुल्क वसूले जाने की शिकायतों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है।
सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची के कार्यालय ने 29 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों को रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र, रेट चार्ट और डॉक्टरों की पूरी जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। मालूम हो कि झारखंड में इस तरह का पहला आदेश रांची जिला से निकाला गया है, अपने अपने जिले के अस्पताल को रजिस्ट्रेशन जिले के सिविल सर्जन द्वारा तय मानक को ध्यान में रखकर दिया जाता है।
इलाज से पहले मरीजों को देनी होगी खर्च की जानकारी
सिविल सर्जन के जारी कार्यालय आदेश (पत्रांक 5236) के अनुसार, रांची जिले के सभी नर्सिंग होम, अस्पताल, क्लीनिक और अन्य संबंधित चिकित्सा संस्थानों को आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर निर्धारित जानकारियां प्रदर्शित करनी होंगी। इसके बाद भी लगातार नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

आदेश में इन बिंदुओं पर विशेष जोर
रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र: अस्पताल या क्लीनिक का वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र रिसेप्शन या किसी ऐसे स्थान पर लगाना होगा, जहां मरीज और आम लोग आसानी से देख सकें।
रेट चार्ट: डॉक्टर की फीस, जांच शुल्क, प्रक्रिया शुल्क, बेड चार्ज और अन्य सेवाओं की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होंगी।
डॉक्टरों की जानकारी: डॉक्टरों का नाम, शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण, विशेषज्ञता और ड्यूटी या परामर्श का समय बताना होगा।
उपलब्ध सुविधाएं: अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
मरीजों के अधिकार: मरीजों के अधिकार, शिकायत निवारण व्यवस्था और लागू दिशा-निर्देशों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।
शुल्क में पारदर्शिता: चिकित्सा सेवाओं के लिए लिए जाने वाले शुल्क में पारदर्शिता रखनी होगी और लागू नियमों के विपरीत छिपे हुए शुल्क नहीं लगाए जा सकेंगे।
जांच के नाम पर कितनी वसूली, मरीज को कैसे पता चलेगा…
निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों के सामने सबसे बड़ी परेशानी कई बार खर्च की स्पष्ट जानकारी नहीं होना है। जांच, डॉक्टर की फीस, बेड और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर कुल बिल कितना बनेगा, इसकी जानकारी मरीज को पहले से मिलना जरूरी है।
रांची के कुछ निजी अस्पतालों में खून की जांच के लिए 30 हजार रुपये तक वसूले जाने का आरोप भी सामने रखा जा रहा है। हालांकि, इस राशि और संबंधित अस्पतालों के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के बजाय जांच की मांग से जुड़े आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
यदि किसी मरीज से महंगी जांच कराने को कहा जाता है, तो उसे जांच की आवश्यकता, संबंधित जांच का नाम, शुल्क और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी मांगने का अधिकार है। किसी भी अस्पताल पर आरोप लगाने से पहले बिल, जांच की पर्ची और अन्य दस्तावेजों के आधार पर तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।
नियम नहीं मानने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाई
सिविल सर्जन कार्यालय के आदेश के अनुसार, संबंधित निरीक्षण अधिकारी और नामित पदाधिकारी अस्पतालों में नियमों के पालन की जांच करेंगे। निरीक्षण के दौरान किसी तरह की कमी या नियमों का उल्लंघन मिलने पर मामला सक्षम अधिकारी के संज्ञान में लाया जाएगा, ताकि लागू कानून के तहत उचित कार्रवाई की जा सके।
अब स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर टिकी नजरें
आदेश जारी होने के बाद सबसे अहम सवाल इसके जमीनी क्रियान्वयन का है। क्या सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में तय समयसीमा के भीतर रेट चार्ट लगाए जाएंगे? क्या निरीक्षण के दौरान जांच शुल्क और अन्य सेवाओं की दरों का भी सत्यापन होगा? और क्या मरीजों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाएगी?
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता केवल रेट चार्ट लगाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मरीजों को इलाज की लागत की स्पष्ट जानकारी मिले और शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा हो, तभी इस पहल का वास्तविक लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा।












