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पुलिस भर्ती में नया एंगल, गर्भवती अभ्यर्थियों की याचिका फिर बहाल, हाईकोर्ट ने फिर खोला पुलिस भर्ती का मामला, खारिज याचिका की फिर होगी सुनवाई

Police News। पुलिस भर्ती को लेकर हाईकोर्ट बड़ा निर्णय ले सकता है। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी गयी याचिका को दोबारा बहाल कर सुनने का फैसला लिया है। दरअसल ये पूरा मामला पुलिस भर्ती में महिला अभ्यर्थियों को आने वाली परेशानी से जुड़ा है। पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान गर्भावस्था के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में शामिल नहीं करना उचित है या अनुचित? इसे लेकर कोर्ट सुनवाई करेगा।

पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि गर्भावस्था के आधार पर फिजिकल टेस्ट स्थगित करने की मांग से जुड़े प्रश्न पर अब तक कोई स्पष्ट न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया है। इसी आधार पर अदालत ने पहले खारिज की गई याचिका को पुनः बहाल करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का रास्ता खोल दिया है। लिहाजा महिला अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है।

5 साल बाद शुरू हुआ पुलिस भर्ती फिजिकल

ये पूरा मामला 2018 के पुलिस भर्ती से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ में पुलिस भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और अन्य कारणों से शारीरिक दक्षता परीक्षा वर्ष 2023 में आयोजित की गई। इस लंबे अंतराल के दौरान कई महिला अभ्यर्थी गर्भवती हो गईं, जिसके चलते वे निर्धारित तिथि पर फिजिकल टेस्ट में शामिल नहीं हो सकीं।महिला अभ्यर्थियों ने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि गर्भावस्था और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें छह महीने या उपयुक्त समय का अतिरिक्त अवसर दिया जाए, ताकि वे भर्ती प्रक्रिया से वंचित न हों और शारीरिक परीक्षा में भाग ले सकें। अब हाईकोर्ट इस पर विचार करेगा।

हाईकोर्ट दोबारा से याचिका सुनने को तैयार

हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले का हवाला देते हुए पहले अभ्यर्थी की याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत का मानना था कि संबंधित विवाद पर पहले ही न्यायिक निर्णय दिया जा चुका है।हालांकि, याचिकाकर्ता रोशनी केरकेट्टा ने पुनरावलोकन (रिव्यू) याचिका दायर कर अदालत को बताया कि जिस पुराने मामले का संदर्भ दिया गया था, उसका मुख्य विषय आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा था। उसमें गर्भावस्था के कारण फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के मुद्दे पर न तो विस्तार से सुनवाई हुई थी और न ही कोई स्पष्ट कानूनी निष्कर्ष दिया गया था।

जानिये क्यों दोबारा हो रही सुनवाई

हाई कोर्ट ने माना कि गर्भावस्था के कारण फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के प्रश्न पर अब तक कोई स्पष्ट न्यायिक निर्णय उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले को पहले से तय मानकर याचिका खारिज करना उचित नहीं होगा।अदालत ने पुनरावलोकन याचिका स्वीकार करते हुए मूल याचिका को बहाल कर दिया है। अब इस मामले में नए सिरे से सुनवाई होगी, जिससे गर्भवती महिला अभ्यर्थियों की मांग पर विस्तृत न्यायिक विचार किया जाएगा।यदि अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला आता है, तो इससे भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में गर्भवती महिला अभ्यर्थियों के अधिकारों और समान अवसर के सिद्धांत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। अब इस रुख के बाद महिला अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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