शर्मनाक! 8वीं के छात्रों की TC पर लाल स्याही से लिख दिया ‘चरित्रहीन’, महिला हेडमास्टर की करतूत से मचा बवाल, अब DEO ने लिया एक्शन…
महिला प्रधानाध्यापक ने 8वीं के दो छात्रों की टीसी पर 'चरित्रहीन' लिख दिया। शिकायत के बाद नई टीसी जारी हुई, लेकिन शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

School News। स्कूल की हेडमास्टर ने दो स्कूली बच्चों के टीसी पर लाल स्याही से लिख दिया..”चरित्रहीन”। पढकर अटपटा जरूर लग रहा होगा, लेकिन ये सच्चाई है। अब इस मामले को लेकर विभाग में हड़कंप मचा है। वहीं डीईओ के निर्देश पर बच्चों को दूसरी टीसी दी गयी है। पूरा मामला मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का है, जहां से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है।
यहां एक सरकारी स्कूल की महिला प्रधानाध्यापक ने कक्षा 8वीं उत्तीर्ण कर चुके दो छात्रों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) पर लाल स्याही से ‘चरित्रहीन’ लिख दिया। इतना ही नहीं, सरकारी रिकॉर्ड में यह भी दर्ज कर दिया कि छात्रों ने “सरकारी दस्तावेज के साथ छेड़छाड़” की है। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा गए और पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
लाल स्याही से लिखी विवादित टिप्पणी
मामला शाहनगर विकासखंड के मेन्हा संकुल अंतर्गत शासकीय माध्यमिक शाला भोपार का है। आरोप है कि स्कूल की प्रधानाध्यापक सत्या सिंह ने वर्ष 2025-26 में पास हुए दो छात्रों की टीसी के आचरण कॉलम में पहले “अच्छा नहीं था” लिखा। इसके बाद विशेष टिप्पणी वाले कॉलम में लाल स्याही से लिख दिया— “टीप : चरित्रहीन, सरकारी दस्तावेज के साथ छेड़खानी करना।”इस टिप्पणी के कारण दोनों छात्रों के सामने दूसरे स्कूल में प्रवेश लेने की समस्या खड़ी हो गई।
पहले भी दी थी ऐसी धमकी
ग्रामीणों के अनुसार, फरवरी 2026 में ही कलेक्टर को शिकायत देकर बताया गया था कि प्रधानाध्यापक छात्रों की टीसी में ‘चरित्रहीन’ लिखने की धमकी दे रही हैं। इसके बावजूद समय रहते शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की और बाद में वही बात सरकारी दस्तावेज में लिख दी गई।
शिकायत के बाद बदली गई टीसी
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी आकांक्षा रावत ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए तत्काल मामले की जांच कराई गई और दोनों छात्रों को संशोधित ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए हैं।
कार्रवाई की उठी मांग
हालांकि छात्रों को नई टीसी मिल गई है, लेकिन स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि 13-14 वर्ष के बच्चों को सरकारी दस्तावेज में ‘चरित्रहीन’ लिखना न केवल अमानवीय है, बल्कि उनके भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।
अब सवाल उठ रहे हैं कि—
• बिना किसी न्यायिक या विभागीय निष्कर्ष के किसी छात्र को ‘चरित्रहीन’ कैसे लिखा जा सकता है?
• सरकारी दस्तावेज में ऐसी टिप्पणी दर्ज करने का अधिकार किस नियम के तहत दिया गया?
• पहले शिकायत मिलने के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
फिलहाल मामले को लेकर संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। वहीं, शिक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है कि शिकायत के बावजूद समय पर हस्तक्षेप क्यों नहीं किया गया।








