Panchak 2026: दुर्गा पूजा खत्म होते ही लग गयी अब शुभ कार्यों पर रोक! शादी-ब्याह पर ब्रेक कोई भी शुभ काम नहीं होगा, जानें कब मिलेगी अब राहत
Dussehra Panchak 2026: पंचक 21 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक रहेगा। जानें पंचक का समय, शादी-ब्याह और मांगलिक कार्यों से जुड़ी मान्यताएं।

नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा का समापन होते ही अब पंचक का साया रहने वाला है। दशहरा के खत्म होते ही पंचांग की एक ऐसी तिथि सामने आई है, जिसका असर शादी-ब्याह से लेकर कई मांगलिक कार्यों तक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष काम करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे में सवाल है कि आखिर पंचक कब से शुरू हो रहा है, कितने दिन तक रहेगा और इस दौरान किन कार्यों पर रोक मानी जाती है? आइए जानते हैं अक्टूबर 2026 के पंचक की पूरी जानकारी।
Dussehra Panchak 2026: दशहरा के बाद कब शुरू होगा पंचक?
महावीर पंचांग के संदर्भ में ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, अक्टूबर 2026 में पंचक की शुरुआत 21 अक्टूबर से होगी। इसकी अवधि पांच दिनों तक रहेगी।
• पंचक शुरू: 21 अक्टूबर 2026, सुबह 4:49 बजे
• पंचक समाप्त: 25 अक्टूबर 2026, शाम 7:55 बजे
• कुल अवधि: लगभग पांच दिन
पंचक की अवधि में विवाह, गृह निर्माण और अन्य मांगलिक कार्यों को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। इसलिए किसी शुभ कार्य की तारीख तय करने से पहले स्थानीय पंचांग और पुरोहित से सलाह लेना उचित रहेगा।
आखिर क्या है पंचक, जिसे झारखंड-बिहार में कहते हैं भदवा?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तब धनिष्ठा के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र तक की अवधि को पंचक कहा जाता है।
झारखंड और बिहार के कई इलाकों में पंचक को भदवा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि के दौरान कुछ विशेष कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। यही वजह है कि पंचक शुरू होने पर लोग शादी-ब्याह, गृह निर्माण और दूसरे शुभ कार्यों की तारीखों को लेकर पंचांग देखते हैं।
5 दिन तक किन शुभ कार्यों को करने से बचें?
पंचक को लेकर प्रचलित ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ कामों को टालना शुभ माना जाता है। इनमें प्रमुख हैं:
• शादी-ब्याह और मांगलिक आयोजन: विवाह जैसे शुभ कार्यों की तारीख तय करते समय पंचांग और स्थानीय परंपरा देखी जाती है।
• घर का निर्माण: कुछ मान्यताओं में पंचक के दौरान छत ढलवाने और नए निर्माण की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
• चारपाई बनवाना: पारंपरिक मान्यता के अनुसार, पंचक में चारपाई बनवाने से परहेज किया जाता है।
• दक्षिण दिशा की यात्रा: कुछ धार्मिक परंपराओं में इस अवधि में दक्षिण दिशा की यात्रा को टालने की सलाह दी जाती है।
• अंतिम संस्कार: पंचक के दौरान अंतिम संस्कार के लिए विशेष धार्मिक नियम बताए गए हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय रीति और योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन किया जाता है।
ध्यान रखें कि ये ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यताएं हैं। पंचक के दौरान सभी शुभ कार्यों पर एक समान या सार्वभौमिक रोक नहीं होती।
धनिष्ठा से रेवती तक, इन 5 नक्षत्रों का क्या है महत्व?
पंचक पांच नक्षत्रों की अवधि से जुड़ा है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में इनके दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।
धनिष्ठा नक्षत्र: इस दौरान आग लगने से जुड़ी आशंकाओं का उल्लेख पारंपरिक मान्यताओं में मिलता है। इसलिए घास, लकड़ी और ज्वलनशील सामग्री जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
शतभिषा नक्षत्र: इसे लेकर कलह और विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। इस दौरान बेवजह बहस करने से परहेज करने की मान्यता है।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र: कुछ परंपराओं में इस नक्षत्र के दौरान नए और शुभ कार्यों की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।
उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र: ये भी पंचक की अवधि में शामिल हैं। इनके दौरान शुभ कार्यों का निर्णय स्थानीय पंचांग और प्रचलित धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है।
कब खत्म होगा पंचक और फिर कब कर सकेंगे शुभ कार्य?
पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2026 का पंचक 25 अक्टूबर को शाम 7:55 बजे समाप्त होगा। इसके बाद शुभ कार्यों के लिए तारीख तय करते समय संबंधित दिन की तिथि, नक्षत्र और अन्य पंचांग संबंधी स्थितियों को देखना चाहिए।विवाह, गृह प्रवेश या किसी अन्य बड़े मांगलिक आयोजन की योजना बना रहे लोगों को केवल पंचक समाप्त होने के आधार पर तारीख तय नहीं करनी चाहिए। शुभ मुहूर्त व्यक्तिगत परंपरा, स्थान और संबंधित पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।












