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स्किन पर खुजली और जलन को न समझें मामूली, सोरायसिस बढ़ा सकता है कैंसर समेत इन गंभीर बीमारियों का खतरा? क्यों कहते हैं डाक्टर्स

Psoriasis Symptoms: त्वचा पर खुजली, जलन और लाल चकत्ते सोरायसिस के संकेत हो सकते हैं। जानिए कैंसर, हार्ट और जोड़ों की बीमारियों से इसका क्या संबंध है।

Psoriasis Symptoms and Cancer Risk: त्वचा पर खुजली, जलन और लाल चकत्ते होना आमतौर पर लोग एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दवा खाते ही कुछ दिन के लिए परेशानी खत्म होती है, फिर ये परेशानी बढ़ जाती है। लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, त्वचा पर मोटी और पपड़ीदार परतें बनने लगें तो सावधान होने की जरूरत है। यह सोरायसिस (Psoriasis) नाम की गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी का संकेत हो सकता है।

डाक्टर्स मानते हैं कि सोरायसिस को केवल त्वचा की बीमारी समझना भी सही नहीं है, क्योंकि गंभीर मामलों में यह जोड़ों और शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ शोधों में सोरायसिस और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध भी सामने आया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोरायसिस होने पर कैंसर होना तय है।

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डॉक्टरों के मुताबिक, सोरायसिस में शरीर का इम्यून सिस्टम त्वचा की कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इससे त्वचा पर लाल, मोटे और सिल्वर-सफेद पपड़ी वाले चकत्ते बनने लगते हैं। वहीं, स्किन एलर्जी आमतौर पर किसी एलर्जेन के संपर्क में आने से होती है। ऐसे में दोनों के लक्षणों में अंतर समझना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं सोरायसिस और सामान्य स्किन एलर्जी में क्या फर्क है, यह बीमारी कितनी गंभीर हो सकती है और कैंसर से इसका क्या संबंध है।

क्या है सोरायसिस और कैसे पहचानें इसके लक्षण?

सोरायसिस एक क्रॉनिक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता त्वचा की कोशिकाओं के सामान्य विकास चक्र को प्रभावित करती है। इसके कारण त्वचा की कोशिकाएं तेजी से बनने लगती हैं और त्वचा पर मोटी परत जमा होने लगती है।
इसके प्रमुख लक्षण हैं:
• त्वचा पर लाल और उभरे हुए चकत्ते।
• चकत्तों पर सिल्वर या सफेद रंग की पपड़ी।
• प्रभावित हिस्से में खुजली और जलन।
• त्वचा का फटना और कभी-कभी खून निकलना।
• सिर की त्वचा, कोहनी, घुटनों और पीठ पर चकत्ते।
• नाखूनों में गड्ढे, मोटापन या रंग में बदलाव।

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सोरायसिस और स्किन एलर्जी में क्या है अंतर?

डॉक्टर रिया चौहान कहती है कि सोरायसिस में त्वचा पर मोटी, लाल और पपड़ीदार परतें बनने लगती हैं। इसका असर केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सिर की त्वचा, नाखूनों और जोड़ों पर भी दिखाई दे सकता है।वहीं, सामान्य स्किन एलर्जी या एक्जिमा में खुजली, लालपन, सूजन, रूखापन और छोटे-छोटे दाने हो सकते हैं। इनमें आमतौर पर सोरायसिस जैसी मोटी सिल्वर-सफेद पपड़ी नहीं बनती।सोरायसिस और एक्जिमा के लक्षण कई बार मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद बीमारी का पता लगाने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

सोरायसिस बढ़ने पर कितना खतरनाक हो सकता है?

 

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सोरायसिस को लंबे समय तक नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। गंभीर मामलों में यह शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।

1. जोड़ों में हो सकता है दर्द और सूजन
कुछ मरीजों में सोरायसिस के कारण सोरियाटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) विकसित हो सकता है। इसमें जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या होती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

2. दिल की बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा
गंभीर सोरायसिस का संबंध हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से भी देखा गया है। इसके अलावा मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी कुछ मरीजों में साथ हो सकती हैं।

3. गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है अस्पताल
सोरायसिस का एक दुर्लभ लेकिन गंभीर रूप एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस (Erythrodermic Psoriasis) है। इसमें शरीर के बड़े हिस्से की त्वचा लाल हो सकती है और तेज खुजली, जलन तथा त्वचा उतरने जैसी समस्या हो सकती है। इसके कारण शरीर में पानी की कमी और तापमान नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल में इलाज की जरूरत होती है।

क्या सोरायसिस से कैंसर भी हो सकता है?

सोरायसिस और कैंसर के बीच संबंध को लेकर कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। JAMA Dermatology में प्रकाशित एक बड़े मेटा-विश्लेषण में 20 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया था। इसमें पाया गया कि सोरायसिस से पीड़ित लोगों में कुल कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ा हुआ दिखाई दिया। खासतौर पर त्वचा के कुछ कैंसर और लिम्फोमा के जोखिम में वृद्धि देखी गई।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सोरायसिस सीधे कैंसर पैदा करता है या हर मरीज को कैंसर हो जाएगा। इस संबंध के पीछे पुरानी सूजन, बीमारी की गंभीरता, धूम्रपान और कुछ उपचारों जैसे कई कारक हो सकते हैं।

इसलिए सोरायसिस के मरीजों को घबराने के बजाय नियमित रूप से डॉक्टर से जांच और उचित उपचार कराना चाहिए। इलाज के विकल्प चुनते समय त्वचा विशेषज्ञ मरीज की बीमारी की गंभीरता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हैं।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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