close
LIVE UPDATE

सहमति से से*क्स रेप नहीं : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ‘शादीशुदा महिला की सहमति से बना शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं’, हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी

Consensual Sex Is Not Rape: High Court's Landmark Verdict — 'Physical Relations with a Married Woman Based on Consent Do Not Constitute Rape'; High Court Acquits the Accused.

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंधों को रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
________________________________________
Highcourt News/30.3.26: शादीशुदा महिला की सहमति से बना शारीरिक संबंध रेप नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए महिला की याचिका खारिज करते हुए आरोपी को बरी करने का आदेश दिया। पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का है। हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में सहमति और यौन संबंधों को लेकर कानून की व्याख्या को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि कोई महिला बालिग है, शादीशुदा है और उसने अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए हैं, तो ऐसे मामले को रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

इसी आधार पर कोर्ट ने करीब चार साल पुराने मामले में रेप के आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया है। आपको बता दें कि यह मामला वर्ष 2022 का है, जिसमें बेमेतरा जिले की एक शादीशुदा महिला ने एक युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने पर रेप का आरोप लगाया था। महिला और आरोपी दोनों एक कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करते थे, जहां उनकी जान-पहचान हुई और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।

इस मामले में महिला ने अपनी शिकायत में बताया था कि रेप का आरोपी ने शादी का वादा कर उसे बहलाया और संबंध बनाने का दबाव बनाया। 25 जुलाई 2022 की सुबह, जब वह शौच के लिए जा रही थी, तब आरोपी ने उसे अपने घर ले जाकर संबंध बनाए। उस समय महिला पहले से शादीशुदा और करीब तीन महीने की गर्भवती थी।

जांच और ट्रायल के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंध दोनों की सहमति से बने थे। महिला ने सामाजिक बदनामी के डर से शुरुआत में घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। बाद में पति को बताने के बाद रेप का मामला दर्ज कराया गया।मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि इस मामले में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने महिला को धमकी देकर या जबरदस्ती संबंध बनाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को यह भ्रम नहीं था कि वह आरोपी की कानूनी पत्नी है, और न ही यह साबित हुआ कि वह अपनी सहमति देने की स्थिति में नहीं थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी आपराधिक मामले में केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि ठोस साक्ष्य जरूरी होते हैं। यदि धमकी, धोखा या दबाव का स्पष्ट प्रमाण नहीं है, तो किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।यह फैसला भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में “सहमति” की परिभाषा को और मजबूत करता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि हर शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट सहमति हो।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *