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झारखंड वेतन घोटाले की क्या निष्पक्ष होगी जांच? जांच कमेटी के सुप्रीमो पर उठे सवाल, जिस वक्त घोटाले की हुई थी शुरुआत, उस खुद SP की पोस्ट पर थे….

Will the investigation into the Jharkhand salary scam be fair? Questions have been raised about the investigation committee's supremo, who was himself a Superintendent of Police (SP) when the scam began.

हजारीबाग/27.4.26: जिले में वेतन मद में हुई कथित फर्जी निकासी के मामले की जांच अब कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं में उलझती नजर आ रही है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या वेतन घोटाले की जांच निष्पक्षता से हो सकेगी? दरअसल जांच की जिम्मेदारी सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक को सौंपे जाने के बाद उनकी पूर्व भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मौजूदा एडीजी मनोज कौशिक साल 2012 से 2014 के बीच इसी जिले में एसपी के पद पर तैनात रहे थे, जबकि जांच का दायरा भी इसी अवधि को छूता है। ऐसे में हजारीबाग में वेतन घोटाले की जांच के बीच ‘हितों के टकराव’ का मुद्दा सामने आया है। एडीजी सीआईडी की पूर्व तैनाती को लेकर सवाल उठे हैं, जबकि उच्च स्तरीय समिति ने 22 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है कि जिस अवधि के वित्तीय लेन-देन की जांच हो रही है, उसी दौरान जिले की कानून-व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी को जांच का जिम्मा देना निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े कर सकता है। इसे संभावित ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ यानी हितों के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। इसी बीच, इस बड़े वित्तीय अनियमितता मामले की समानांतर जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

वहीं, समिति के अध्यक्ष डॉ. अमिताभ कौशल ने जिले के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र लिखकर 22 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।समिति ने विशेष रूप से वर्ष 2011 से 2026 तक की अवधि में हुए सभी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। इनमें बजट आवंटन, स्वीकृति आदेश, भुगतान वाउचर, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, और पूर्व में हुई जांच रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।

उद्देश्य यह समझना है कि फर्जी निकासी की प्रक्रिया किन स्तरों पर हुई और किस प्रकार नियमों की अनदेखी की गई।सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों की प्रारंभिक समीक्षा के बाद समिति संबंधित जिलों—खासतौर पर बोकारो और हजारीबाग—का दौरा भी करेगी। इस दौरान जमीनी स्तर पर तथ्यों की पुष्टि और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यही है कि जांच के दो समानांतर तंत्र—एक ओर सीआईडी और दूसरी ओर उच्च स्तरीय समिति—एक ही अवधि और रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।

ऐसे में समन्वय, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच अधिकारी की पूर्व भूमिका उसी अवधि से जुड़ी हो, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य सरकार के हाथ में है कि वह जांच की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कोई बदलाव करती है या मौजूदा व्यवस्था के तहत ही आगे बढ़ती है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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