close
LIVE UPDATE

झारखंड- FIR दर्ज न करने पर हाईकोर्ट सख्त, धनबाद SSP को तलब, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

Jharkhand: High Court issues notice to Dhanbad SSP for not registering FIR; questions raised on police's working style

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद में एक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करने पर पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
________________________________________
रांची/धनबाद/27.4.26। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस के रवैये पर नाराजगी जतायी है। कोर्ट ने धनबाद में शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ में ये सुनवाई हुई। यह पूरा प्रकरण एक क्रिमिनल अपील से जुड़ा हुआ है, जिसमें अपीलकर्ता रवि साव को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद पीड़िता ने अदालत में जमानत रद्द करने की याचिका दायर की। पीड़िता का आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने फिर से अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया।

पीड़िता के अनुसार, उसने इस संबंध में साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। जब यह तथ्य अदालत के सामने आया, तो खंडपीठ ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

अदालत ने स्पष्ट तौर पर पूछा कि जब शिकायत में संज्ञेय अपराध का उल्लेख है, तो फिर एफआईआर दर्ज करने में देरी या इनकार क्यों किया गया। कोर्ट ने इसे पुलिस की गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती है और पीड़ितों के अधिकारों का हनन करती है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने धनबाद के एसएसपी को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूरे मामले की जानकारी देने और एफआईआर दर्ज न करने के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने का आदेश दिया है। यह निर्देश पुलिस प्रशासन के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है।

अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने पक्ष रखा, जबकि पीड़िता की ओर से भी अदालत में विस्तृत दलीलें प्रस्तुत की गईं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आगे कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *