झारखंड का घोटालेबाज सिपाही: आठ साल तक ट्रेजरी से होता रहा खेला, 4 बैंक खातों के जरिये करोड़ों का गोलमाल, पढ़िये पूरी कहानी
झारखंड के चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में CID जांच के दौरान बड़ा खुलासा। सिपाही देवनारायण मुर्मू पर 8 साल में करोड़ों रुपये की अवैध वेतन निकासी, IFMS पोर्टल और DDO कोड से छेड़छाड़ का आरोप। डिजिटल फोरेंसिक जांच जारी।

रांची। झारखंड के चाईबासा ट्रेजरी में वेतन घोटाले को लेकर चौकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) को जांच के दौरान कई जानकारियां मिली है। गिरफ्तार सिपाही देवनारायण मुर्मू के खिलाफ जो साक्ष्य मिले हैं, उससे गड़बड़ियां और भी गंभीर होती दिख रही है। सीआईडी ने उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें करोड़ों रुपये के वित्तीय कुप्रबंधन, धोखाधड़ी और सरकारी सिस्टम में सेंधमारी की विस्तृत जानकारी दी गई है।
8 वर्षों तक चलता रहा खेल
सीआईडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2025 के बीच चाईबासा एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में पदस्थ सिपाही देवनारायण मुर्मू ने वेतन मद से अवैध रूप से बड़ी राशि की निकासी की। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने अपने आठ साल के कार्यकाल में करोड़ों रुपये का गबन कर उसे विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाया।
चार राज्यों-जिलों के खातों में पहुंची रकम
जांच में ये बातें सामने आयी है कि अवैध रूप से निकाली गई राशि को छिपाने के लिए आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चार अलग-अलग खातों का उपयोग किया। इनमें जमशेदपुर के पोटका, रांची के मोरहाबादी (टैगोर हिल), चाईबासा की मुख्य शाखा और ओडिशा के मयूरभंज जिले के बहलदा स्थित खातों का इस्तेमाल किया गया।सीआईडी अब इन खातों के वास्तविक लाभार्थियों, खाताधारकों और आरोपी के संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
DDO कोड और IFMS पोर्टल से की छेड़छाड़
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने सरकारी वित्तीय प्रणाली में गंभीर सेंधमारी की। उसने चाईबासा एसपी कार्यालय के डीडीओ (Drawing and Disbursing Officer) कोड और एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) पोर्टल के डेटा में हेरफेर कर अवैध भुगतान की प्रक्रिया को अंजाम दिया।सीआईडी के अनुसार, सरकारी फाइलों और कंप्यूटर डेटा में बदलाव कर करोड़ों रुपये की निकासी की गई। इस अनियमितता का खुलासा तब हुआ जब झारखंड वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार (AG) की टीम ने खातों की गहन समीक्षा की।
फोरेंसिक जांच से मिलेंगे अहम सबूत
मामले को और मजबूत बनाने के लिए एसआईटी ने कार्यालय में उपयोग किए गए कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए हैं। इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिस्टम में किस तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। यह रिपोर्ट अदालत में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में पेश की जाएगी।
जांच का दायरा बढ़ा
सीआईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। बैंक खातों के लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।









