शहीद जवानों के बच्चों के लिए वरदान बनेगा ‘दिशोम गुरू शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय’, जानिये क्या-क्या रहेगी सुविधा, सीएम से मिली हरी झंडी
झारखंड में शहीद पुलिसकर्मियों और जवानों के बच्चों के लिए 22 करोड़ रुपये की लागत से दिशोम गुरू शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय स्थापित होगा। जानिए योजना की पूरी जानकारी।

रांची। झारखंड सरकार ने शहीद पुलिसकर्मियों और जवानों के परिवारों के लिए एक बड़ी पहल करने जा रही है। हेमंत सरकार शहीदों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के टेंडरग्राम स्थित झारखंड जगुआर कैंप परिसर में प्रस्तावित ‘दिशोम गुरू शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय’ की योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
करीब 22 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को विभागीय मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसे योजना प्राधिकृत समिति के पास भेज दिया है। समिति की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट में अंतिम स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।
क्या है दिशोम गुरू शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय योजना?
दिशोम गुरू शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय का उद्देश्य शहीद पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के जवानों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह विद्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और इसे राज्य के प्रमुख आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में विकसित किया जाएगा।
विद्यालय का संचालन समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की तर्ज पर किया जाएगा। यहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ आवास, खेल, पुस्तकालय, तकनीकी संसाधन और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
पहली से बारहवीं तक होगी पढ़ाई
प्रस्तावित विद्यालय में कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा दी जाएगी। हालांकि, पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।वहीं, कक्षा छह से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए पूर्ण आवासीय व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे बेहतर वातावरण में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
स्टेट ऑफ आर्ट सुविधाओं से होगा लैस
सरकार इस विद्यालय को ‘स्टेट ऑफ आर्ट’ संस्थान के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। यहां आधुनिक कक्षाएं, डिजिटल लर्निंग सुविधाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, खेल मैदान, पुस्तकालय, छात्रावास और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का मानना है कि शहीद जवानों और पुलिसकर्मियों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराकर उनके भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने किया था प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण
हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टेंडरग्राम स्थित झारखंड जगुआर कैंप परिसर में प्रस्तावित विद्यालय के लिए चिन्हित भूमि का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को विद्यालय की स्थापना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
देश के चुनिंदा राज्यों में ही ऐसी व्यवस्था
जानकारों के अनुसार देश में बहुत कम ऐसे राज्य हैं जहां शहीद जवानों और पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए विशेष आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। झारखंड सरकार की यह पहल न केवल शहीद परिवारों को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रखेगी।
शहीद परिवारों को मिलेगा बड़ा सहारा
सरकार का मानना है कि देश और राज्य की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों के प्रति यह नैतिक जिम्मेदारी है कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। दिशोम गुरू शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय इसी सोच को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।









