close
LIVE UPDATE

झारखंड: “पति के इलाज के लिए पत्नी मांग रही है रोड पर भीख” झारखंड की इस तस्वीर ने सिस्टम को कर दिया शर्मिंदा

झारखंड के गुमला में गरीब महिला को पति के इलाज के लिए सड़क पर भीख मांगनी पड़ी। अस्पताल में संसाधनों की कमी और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से उठे सवाल।

गुमला में मजबूरी की इंतहा: पति के इलाज के लिए पत्नी को सड़क पर मांगनी पड़ी भीख

सिस्टम पर सवाल, अस्पताल में संसाधनों की कमी

गुमला। यूं तो कहने को प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधा को लेकर लाखों योजना है। अस्पतालों में मुफ्त इलाज की दुहाईयां देते सरकार नहीं थकती है, लेकिन हकीकत में आज की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी लाचार है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण गुमला में देखने को मिल रहा है। जहां अपने बीमार पति के इलाज के लिए पत्नी को सड़क पर भीख मांगनी पड़ रही है।

गुमला जिले से ये बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां सदर अस्पताल गुमला में भर्ती एक गरीब मरीज के इलाज के लिए उसकी पत्नी को सड़क पर आंचल फैलाकर लोगों से आर्थिक मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती प्रक्रिया पूरी करने के बाद संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए, जिससे पूरा परिवार बेसहारा हो गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 “एक वक्त का खाना भी मुश्किल”, पत्नी का दर्द छलका

मरीज की पत्नी रोहिणी कुजूर ने बताया कि अस्पताल से मिलने वाले मुफ्त भोजन के सहारे ही वह अपने बीमार पति और छोटे बच्चे के साथ किसी तरह दिन गुजार रही हैं। उन्होंने कहा,

“पति की हालत बिगड़ती जा रही है, बच्चे की भूख देखकर दिल टूट जाता है। राशन कार्ड नहीं है, इसलिए सरकारी अनाज भी नहीं मिलता। डॉक्टर बाहर की महंगी दवाइयां लिख रहे हैं… हम पूरी तरह लाचार हैं।”

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

घर का कमाने वाला अस्पताल में, परिवार भूख के कगार पर

जानकारी के अनुसार, काटासारू गांव निवासी जगन्नाथ तिर्की पिछले एक सप्ताह से गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती हैं। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।उनके बीमार पड़ते ही घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। परिवार के पास न राशन कार्ड है और न ही आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिल रहा है।

 सड़क पर आंचल फैलाकर मांगी मदद

जब इलाज के लिए पैसे नहीं बचे, तो रोहिणी कुजूर जशपुर रोड स्थित टंगरा मार्केट के पास सड़क किनारे बैठ गईं और राहगीरों से मदद मांगने लगीं।इस दौरान कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी साथ दिया और लोगों से सहयोग की अपील की। राहगीरों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 10, 20, 50, 100 और 200 रुपये तक की मदद की, लेकिन यह राशि इलाज के भारी खर्च के सामने बेहद कम है। यह घटना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। सवाल उठ रहे हैं कि जब योजनाएं मौजूद हैं, तो जरूरतमंद लोगों तक उनका लाभ क्यों नहीं पहुंच पा रहा।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *