मुन्नाभाई MBBS स्टूडेंट ही था: NEET सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड निकला मेडिकल स्टूडेंट मयंक, पुलिस जांच में चौकाने वाला खुलासा
लखीसराय NEET UG 2026 पुनर्परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा। PMCH के एमबीबीएस छात्र मयंक कश्यप पर सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड होने का आरोप। SIT जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य।

NEET Solver gang। NEET UG 2026 पुनर्परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन और पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले के कथित मास्टरमाइंड को चिन्हित कर लिया है। जांच में सामने आया है कि पूरे सॉल्वर गैंग का संचालन कोई बाहरी एजेंट नहीं, बल्कि पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) का एक एमबीबीएस छात्र कर रहा था।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी मयंक कश्यप न केवल सॉल्वर नेटवर्क का हिस्सा था, बल्कि उसने परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर डमी परीक्षार्थियों को एग्जाम हॉल तक पहुंचाने की पूरी साजिश रची थी।
बायोमीट्रिक कंपनी में घुसकर रची साजिश
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मयंक कश्यप हाजीपुर के पासवान चौक का निवासी है और पीएमसीएच में एमबीबीएस चौथे वर्ष का छात्र है।जांच में पता चला कि परीक्षा केंद्रों पर बायोमीट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर उसने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश हासिल किया। इसके बाद उसने बायोमीट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा कक्ष तक पहुंचाया।
केंद्रीय विद्यालय केंद्र से पकड़े गए सबसे ज्यादा फर्जी परीक्षार्थी
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए कुल 9 फर्जी परीक्षार्थियों में से 7 अकेले केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से पकड़े गए। जांच एजेंसियों का मानना है कि बायोमीट्रिक सिस्टम में की गई छेड़छाड़ के कारण ही यह संभव हो पाया।
प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों से जुड़े मिले तार
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस सॉल्वर गैंग के तार देश के कई प्रतिष्ठित मेडिकल और स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों से जुड़े हुए हैं। गिरफ्तार फर्जी परीक्षार्थियों में ऐसे छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो विभिन्न मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी संस्थानों से जुड़े हैं।प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए लाखों रुपये में सौदे किए गए थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन, संपर्क सूत्रों और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
जांच के दायरे में कई और लोग
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल फर्जी परीक्षार्थियों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा संचालन से जुड़े और कौन-कौन लोग इस रैकेट का हिस्सा थे। डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है।यदि जांच में और सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।









