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Jharkhand High Court News: नक्सली की पत्नी होना अपराध नहीं, 7 साल 8 माह की सजा काट चुकी महिला को कोर्ट ने किया बरी

झारखंड हाईकोर्ट ने 19 साल पुराने नक्सल मामले में गुमला की प्रमिला देवी को बरी करते हुए कहा कि केवल नक्सली की पत्नी होना या घटनास्थल पर मौजूद होना अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

रांची। “नक्सली की पत्नी होने भर से अपराध साबित नहीं हो जाता” झारखंड हाईकोर्ट ने 19 वर्ष पुराने नक्सलवाद से जुड़े मामले में गुमला की प्रमिला देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने गुमला की निचली अदालत द्वारा 7 अप्रैल 2007 को सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए उनकी आपराधिक अपील स्वीकार कर ली।हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि केवल घटनास्थल पर मौजूद होना या किसी नक्सली की पत्नी होना किसी व्यक्ति को अपराधी साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि प्रमिला देवी किसी प्रतिबंधित नक्सली संगठन की सक्रिय सदस्य थीं। साथ ही यह भी साबित नहीं हो सका कि उनके कब्जे से कोई हथियार या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ किसी प्रत्यक्ष या विशिष्ट आपराधिक कृत्य का भी कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। ऐसे में दोषसिद्धि कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकती।

ट्रायल कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर समुचित विचार किए बिना प्रमिला देवी को दोषी ठहरा दिया था। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि और सजा का आदेश न्यायसंगत नहीं था। दरअसल गुमला की निचली अदालत ने प्रमिला देवी को हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा डालने, लूट का सामान रखने, आर्म्स एक्ट और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए आठ वर्ष तक के कठोर कारावास सहित अन्य सजाएं सुनाई थीं।

2004 के एनकाउंटर से जुड़ा था मामला

यह मामला वर्ष 2004 का है। गुमला जिले के बिशुनपुर थाना क्षेत्र के निनार गांव में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार, इस मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए थे, जबकि प्रमिला देवी और एक अन्य महिला को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने प्रमिला देवी को प्रतिबंधित नक्सली संगठन के सब-जोनल कमांडर प्रतुल भुइयां की पत्नी बताया था। हालांकि हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं था।

सात साल से अधिक जेल में रह चुकी थीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि प्रमिला देवी करीब सात वर्ष आठ महीने जेल में रह चुकी हैं। वर्ष 2011 में सजा पूरी करने और जुर्माना जमा करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें पूर्ण रूप से बरी किया जाना चाहिए।
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Jharkhand High Court: 19 साल पुराने नक्सल मामले में महिला बरी, कोर्ट बोला- सिर्फ नक्सली की पत्नी होना अपराध नहीं
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Jharkhand High Court Naxal Case
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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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