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गोबिंदपुर स्वास्थ्य केंद्र वेतन घोटाला पार्ट-3 : एक साल तक हर महीने बढ़ता रहा वेतन, किसी को भनक तक नहीं! अब ‘भूलवश’ लिखकर गुपचुप रिकवरी आदेश, HPBL के खुलासे पर हड़कंप, फोन कर दवाब बनाने की कोशिश

Gobindpur Health Centre Salary Scam (Part 3): Salaries kept increasing month after month for a year without anyone even realizing it! Now, a recovery order has been issued quietly, citing an 'oversight'; HPBL's exposé has caused a stir, leading to attempts to exert pressure via phone calls.

धनबाद। झारखंड में चर्चित वेतन घोटाले के बीच गोबिंदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सामने आया वेतन गोलमाल अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के ब्लॉक डाटा मैनेजर (BDM) संजय कुमार को पूरे एक साल तक हर महीने 3,888 रुपये अतिरिक्त वेतन मिलता रहा, लेकिन न तो स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी को इसकी जानकारी हुई और न ही वेतन तैयार करने वाले कर्मचारी को अपनी गलती का अहसास हुआ। सवाल अहम है कि और कितने चहेते की मनमाने तरीके से वेतन बढ़ोतरी हुई है।

साल भर बाद जब गोबिंदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी के निर्देश पर वेतन रिकवरी का आदेश जारी हुआ, तो उसमें एक शब्द लिखा गया— “भूलवश”। सवाल यह है कि यदि एक बार गलती हो जाए तो उसे भूल माना जा सकता है, लेकिन जुलाई 2025 से जून 2026 तक लगातार 12 महीने हर माह अतिरिक्त वेतन का भुगतान भी क्या सिर्फ “भूलवश” होता रहा?

संयोग ही कहिए कि इसी दौरान पुलिस विभाग में भी इसी तरह के वेतन घोटाले का खुलासा हुआ और मामला CID जांच तक पहुंच गया। इसके बाद मानो गोबिंदपुर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुली और आनन-फानन में रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वरना यह “भूल” आखिर कब तक चलती रहती, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

HPBL के खुलासे के बाद मचा हड़कंप

गोबिंदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वेतन घोटाले का खुलासा HPBL न्यूज द्वारा किए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्र बताते हैं कि 4 जुलाई 2026 को जो रिकवरी आदेश जारी किया गया, उसमें भी कई सवाल खड़े करने वाली बातें हैं।

HPBL के पास रिकवरी से जुड़ा दस्तावेज मौजूद है। हैरानी की बात यह है कि सामान्यतः इस तरह के मामलों में संबंधित अधिकारी सीधे रिकवरी का आदेश जारी करते हैं, लेकिन यहां प्रभारी BPM और BAM के आवेदन पर चिकित्सा प्रभारी ने टीप (नोट) लिखकर रिकवरी का निर्देश दिया है। संभवतः विभाग का यह ऐसा दुर्लभ मामला होगा, जहां रिकवरी का आदेश किसी आवेदन पर लिखी गई टीप के जरिए जारी किया गया। यहां जानकारी देना आवश्यक है कि वर्तमान प्रभारी BPM और BAM अगस्त 25 में पूर्व के BPM और BAM के स्थानांतरण के बाद पदभार संभाला है

खुलासे के बाद HPBL पर दबाव बनाने की कोशिश

HPBL द्वारा वेतन घोटाले की खबर प्रकाशित किए जाने के बाद संस्थान पर दबाव बनाने की कोशिश भी शुरू हो गई। शनिवार देर शाम 810xxxxxxx नंबर से एक महिला ने फोन कर इस खबर को लेकर दबाव बनाने का प्रयास किया।

जब महिला को यह अहसास हुआ कि HPBL के पास पूरे मामले के पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं, तो उनके तेवर नरम पड़ गए। बातचीत के दौरान HPBL की ओर से कई बार महिला से पूछा गया कि वह किस पहचान से इस मामले में फोन कर रही हैं। इस पर वह खुद को कभी “भारत का नागरिक” तो कभी “जिम्मेदार नागरिक” बताती रहीं।

महिला ने अपना नाम जरूर बताया, लेकिन उनकी गरिमा का सम्मान करते हुए HPBL यहां उनका नाम प्रकाशित नहीं कर रहा है।

दिलचस्प बात यह रही कि महिला ने बातचीत के दौरान रिपोर्टर का कॉल रिकॉर्ड करने की बात कही। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “आप हमारी बातों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।” ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसी पत्रकार की बातचीत रिकॉर्ड कर उसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता?

कौन किसे बचा रहा है?

पूरे 12 महीने तक करीब 45 हजार रुपये अतिरिक्त वेतन का भुगतान होता रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह राशि वास्तव में “भूलवश” खाते में जा रही थी, तो क्या ब्लॉक डाटा मैनेजर संजय कुमार की भी यह जिम्मेदारी नहीं थी कि वे अपने खाते में आ रही अतिरिक्त राशि की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देते?

फोन करने वाली महिला भी बार-बार HPBL से यही सवाल पूछती रहीं कि “क्या BDM वेतन बनाता है?”

HPBL का जवाब साफ है—

ठीक है, BDM वेतन नहीं बनाता… लेकिन क्या बिना अनुमोदन के हर महीने बढ़ा हुआ वेतन लेकर कोई BDM पूरे साल तक चुप रह सकता है?

पढ़िए रिकवरी आवेदन में क्या लिखा है…

रिकवरी से जुड़ा आवेदन HPBL के पास सुरक्षित है। फिलहाल इस दस्तावेज को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है, लेकिन उसमें लिखी बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं।

प्रभारी बीपीएम और BAM द्वारा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए आवेदन में लिखा गया है—

“संजय कुमार (प्रखंड डाटा प्रबंधक) का वेतन माह जुलाई 2025 से जून 2026 तक 28,699 रुपये प्रतिमाह भुगतान किया गया, जबकि उनका वास्तविक वेतन 24,811 रुपये प्रतिमाह है। इस संस्थान में वेतन भुगतान से संबंधित पूर्व के दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण भूलवश अतिरिक्त भुगतान हो गया। कार्यालय को वेतन विसंगति की जानकारी जून 2026 का वेतन तैयार करने के बाद हुई।”

आवेदन में आगे उल्लेख है कि—

“मई एवं जून 2026 के वेतन भुगतान के दौरान वेतन विसंगति की पुष्टि हुई। इसके बाद आपके आदेशानुसार जुलाई 2026 तथा अगस्त 2026 के वेतन से अतिरिक्त राशि का समायोजन करने का निर्देश प्राप्त हुआ है, जिसका समायोजन किया जाएगा।”

इस आवेदन पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने टीप लिखते हुए निर्देश दिया—

“अगले दो माह के वेतन से वेतन विसंगति का समायोजन किया जाए।”

सवाल अभी भी बाकी हैं…

रिकवरी आवेदन और उस पर लिखे गए आदेश कई सवाल छोड़ जाते हैं। जब हर महीने वेतन पंजी पर हस्ताक्षर किए जाते थे, तब क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी वेतन विवरण नहीं देखा? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?

क्या यह सिर्फ एक “भूल” थी… या फिर इसके पीछे किसी की मिलीभगत भी थी?

इस पूरे मामले की अगली परत और कई नए दस्तावेजों के साथ… अगली किश्त जल्द।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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