नियमितिकरण का मामला पहुंचा हाईकोर्ट : 35 साल से अनियमित कर्मचारी के तौर पर कर रहे काम, फिर भी नियमित नहीं हुई नौकरी; दैनिक वेतनभोगियों ने दायर की याचिका
झारखंड में 35 साल से दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कर रहे चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Highcourt News। नियमितिकरण का एक और प्रकरण हाईकोर्ट पहुंच गया है। 35 साल से अनियमित कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तीन दशक से ज्यादा समय से सरकारी कार्यालयों में दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कर रहे चतुर्थवर्गीय कर्मियों ने सेवा नियमितीकरण की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है।
मामला पलामू समाहरणालय और उससे जुड़े विभिन्न कार्यालयों से जुड़ा है। जहां साल 1988-89 से आदेशपाल के रूप में सेवाएं दे रहे कर्मियों का कहना है कि लंबे समय तक सरकारी काम करने के बावजूद उन्हें अब तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका है।कर्मियों की ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर सेवा नियमित करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि वे वर्षों से समान प्रकृति का सरकारी कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन नियमितीकरण के मामले में उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
1994 और 1998 में निकला था चतुर्थवर्गीय पदों का विज्ञापन
अपील में कहा गया है कि चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए वर्ष 1994 और 1998 में विज्ञापन जारी किए गए थे। हालांकि, विभिन्न कारणों से इन विज्ञापनों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।इसके बाद लंबे समय से दैनिक कर्मियों की सेवा नियमित करने की मांग उठती रही। इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं भी दाखिल हुईं। कर्मियों के अनुसार, इन मामलों में अदालत की ओर से संबंधित पक्षों के पक्ष में आदेश भी पारित किए गए।
कोर्ट के आदेश के बाद हुई पात्रता की जांच
कर्मियों ने बताया कि न्यायालय के निर्देश के बाद जिला स्थापना कार्यालय की ओर से एक जांच दल का गठन किया गया था। इस जांच के माध्यम से नियमितीकरण के लिए पात्र कर्मियों की स्थिति और सेवा संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई।इसके बावजूद सभी पात्र दैनिक कर्मियों को नियमित सेवा का लाभ नहीं मिल सका।
2018 में नियुक्तियां हुईं, लेकिन कई कर्मी रह गए बाहर
अपील में वर्ष 2018 में हुई स्थापना समिति की बैठक का भी उल्लेख किया गया है। कर्मियों के मुताबिक, इसके बाद विभिन्न सरकारी कार्यालयों में चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्तियां की गईं।आरोप है कि उस समय कुछ दैनिक मजदूरों को सेवा में बनाए रखा गया, लेकिन लंबे समय से काम कर रहे अन्य कर्मियों की सेवाओं का नियमितीकरण नहीं किया गया। कर्मियों का तर्क है कि जब वे समान परिस्थितियों में वर्षों से काम कर रहे हैं, तो उन्हें अलग-अलग तरीके से लाभ दिए जाने का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
दैनिक कर्मियों ने अपनी अपील में सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील संख्या 13950-13951/2024, अमृत यादव बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया है। कर्मियों का कहना है कि उक्त फैसला विज्ञापन संख्या 01/2010 से संबंधित नहीं है, बल्कि सेवा नियमितीकरण के सवाल से जुड़ा है। इसलिए उनका दावा है कि जिस आधार पर कुछ कर्मियों को सेवा में बनाए रखा गया, उसी आधार पर अन्य पात्र दैनिक मजदूरों के नियमितीकरण पर भी विचार किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर शुरू की सुनवाई
मामले से जुड़े विवेका शुक्ला के मुताबिक, झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी अपील स्वीकार कर ली है और मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। लंबे समय से नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे कर्मियों को अब अदालत से राहत की उम्मीद है। इन कर्मियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा सरकारी कार्यालयों में काम करते हुए बिताया है। ऐसे में अब उनकी मुख्य मांग यही है कि उनकी वर्षों पुरानी सेवा को देखते हुए नियमों के तहत नियमितीकरण का रास्ता साफ किया जाए।











