श्राद्ध के दौरान दर्दनाक हादसा : श्राद्ध करने गए थे अपनों की आत्मा की शांति के लिए, लौटे तो पांच अर्थियां उठीं
सुखनई नदी में श्राद्ध के दौरान बड़ा हादसा हो गया। अनूप तिवारी को बचाने उतरे चार परिजन भी डूब गए। पिता-पुत्र समेत 5 की मौत।

Crime News: पितृ पक्ष के दौरान एक बेहद की दर्दनाक हादसा हो गया। पितरों के श्राद्ध के दौरान एक ही परिवार के पांच लोगों की डूबने से मौत हो गयी। मामला यूपी के झांसी का है, जहां सुखनई नदी का किनारा पितरों की शांति के लिए हो रहे श्राद्ध कर्म का साक्षी बना था। परिवार के लोग पूर्वजों को याद कर पिंडदान और पूजा कर रहे थे। लेकिन, किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद यही नदी परिवार के पांच सदस्यों को हमेशा के लिए अपने साथ ले जाएगी।
मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के सुखनई नदी तट पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। श्राद्ध कर्म के दौरान नदी में उतरे परिवार के मुखिया अनूप तिवारी (45) अचानक गहरे पानी में चले गए। उन्हें डूबता देखकर उनके बेटे, भांजे और दो भतीजे उन्हें बचाने के लिए नदी में उतर गए।एक को बचाने के लिए एक-एक कर पांच लोग पानी में समाते चले गए। देखते ही देखते पितृपक्ष का वह धार्मिक अवसर परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया।
एक साथ पहुंचे थे पितरों का श्राद्ध करने
देवीसिंह पुरा निवासी अनूप तिवारी अपने 12 वर्षीय बेटे अर्पित के साथ सुखनई नदी पहुंचे थे। उनके साथ जालौन निवासी भांजा पुष्कर शुक्ला (23) और भतीजे अभिनय तिवारी (26) तथा श्रेयांश तिवारी (21) भी थे।परिवार पूर्वजों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए नदी किनारे पहुंचा था। कर्मकांड के बाद अनूप तिवारी आचमन और पूजा के लिए नदी में उतरे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चले गए।तट पर मौजूद परिजनों ने उन्हें डूबते देखा तो किसी ने यह नहीं सोचा कि नदी कितनी गहरी है या बहाव कितना तेज है। अपनों को बचाने की कोशिश में बेटा अर्पित, भांजा पुष्कर और दोनों भतीजे अभिनय व श्रेयांश भी पानी में उतर गए।
एक को बचाने उतरे चार, फिर पांचों डूब गए
अनूप को बचाने के लिए नदी में उतरे चारों परिजन खुद भी मुश्किल में फंस गए। पानी की गहराई और तेज बहाव के बीच वे एक-दूसरे को संभाल नहीं सके।कुछ ही पलों में पांचों लोग नदी के गहरे हिस्से में डूब गए।किनारे मौजूद लोगों ने शोर मचाकर मदद मांगी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंचे। करीब 30 मिनट तक चले तलाश अभियान के बाद पांचों के शव नदी से बाहर निकाले गए।उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।
पिता-पुत्र समेत पांच मौतों से घर में मातम
इस हादसे में एक ही परिवार के पिता-पुत्र, दो भतीजे और एक भांजे की मौत हुई है। अनूप तिवारी और उनके 12 वर्षीय बेटे अर्पित की मौत ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है।जिस घर में पितरों के श्राद्ध की तैयारी और परिवार के साथ पूजा की बातें हो रही थीं, वहां अब मातम पसरा है। जिन लोगों के साथ परिवार नदी किनारे गया था, उनमें से पांच वापस नहीं लौट सके।एक साथ पांच सदस्यों की मौत की खबर ने गांव और आसपास के क्षेत्र को भी स्तब्ध कर दिया।
पितरों की शांति के लिए गए थे, अपनों को ही खो बैठे
पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। परिवार के सदस्य उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। सुखनई नदी के तट पर भी यही धार्मिक कर्मकांड चल रहा था।
लेकिन कुछ ही देर में पूरा दृश्य बदल गया।पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए निकला परिवार खुद ऐसी त्रासदी का शिकार हो गया, जिसकी टीस शायद आने वाली पीढ़ियों तक परिवार के साथ रहेगी।सबसे मार्मिक बात यह रही कि अनूप तिवारी को बचाने के लिए उनके बेटे और रिश्तेदारों ने अपनी जान की परवाह तक नहीं की। मदद के लिए नदी में उतरे चारों लोग भी उसी हादसे में अपनी जान गंवा बैठे।
प्रशासन ने आर्थिक मदद का भरोसा दिया
घटना की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।मऊरानीपुर के सीओ रत्नेश कुमार के अनुसार, मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। वहीं एसडीएम मनोज कुमार भारती ने बताया कि पीड़ित परिवार को शासन के नियमानुसार आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन ने सहायता की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भरोसा दिया है।
अब नदी किनारे रह गईं सिर्फ यादें
सुखनई नदी का वही किनारा, जहां मंगलवार को मंत्रोच्चार और श्राद्ध कर्म हो रहा था, अब पांच परिवारजनों की यादों से जुड़ गया है।एक पिता अपने बेटे को खो गया, एक मां ने अपना बच्चा खो दिया, भाई ने भाई खोया और परिवार ने एक साथ पांच अपनों को खो दिया।वे नदी के किनारे पितरों को विदाई देने गए थे, लेकिन लौटकर अपने ही घरों में पांच मौतों का मातम छोड़ गए। मंगलवार की वह दोपहर परिवार के लिए कभी न भूल पाने वाली त्रासदी बन गई।












