Jharkhand DGP विवाद: बाबूलाल मरांडी के बयान पर पुलिस एसोसिएशन का पलटवार, कहा- अपमानजनक भाषा स्वीकार्य नहीं
झारखंड में डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर बाबूलाल मरांडी के सोशल मीडिया पोस्ट पर पुलिस एसोसिएशन ने आपत्ति जताई। जानिए एसोसिएशन ने क्या कहा और मरांडी ने क्या आरोप लगाए।

रांची। झारखंड में डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और वर्तमान घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के सोशल मीडिया पोस्ट पर अब झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय ने मरांडी के बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
दरअसल, बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डीजीपी तदाशा मिश्रा को संबोधित करते हुए उनकी नियुक्ति और राज्य सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में डीजीपी नियुक्ति मामले की सुनवाई का हवाला देते हुए सरकार और डीजीपी पर टिप्पणी की थी।
‘भद पिटने’ जैसे शब्दों पर पुलिस एसोसिएशन ने जताई आपत्ति
पुलिस एसोसिएशन के राकेश कुमार पांडेय ने कहा कि संवैधानिक और जनसेवा से जुड़े वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए ‘भद पिटना’ जैसी भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष विचाराधीन मामलों को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय संयम और पदों की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
एसोसिएशन के मुताबिक, इस तरह की भाषा संस्थागत गरिमा और सार्वजनिक विमर्श के स्तर को प्रभावित करती है।एसोसिएशन ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था और जनता की सेवा में जुटे पुलिस बल के मनोबल को लेकर भी ऐसे बयानों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
एएसआई अजय सिंह का नाम लिए जाने पर भी आपत्ति
पुलिस एसोसिएशन ने बाबूलाल मरांडी के पोस्ट में एएसआई अजय सिंह का नाम लिए जाने पर भी विरोध जताया है। एसोसिएशन के मुताबिक, अजय सिंह मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात हैं और संगठन के सम्मानित सदस्य हैं।एसोसिएशन ने उनके नाम को डीजीपी की नियुक्ति और पुलिस व्यवस्था से जोड़ने संबंधी टिप्पणी को निराधार बताते हुए आपत्ति दर्ज की है।
‘झारखंड पुलिस कानून और नियमों के तहत करती है काम’
पुलिस एसोसिएशन ने कहा कि झारखंड पुलिस एक अनुशासित और संवैधानिक व्यवस्था के तहत काम करती है। संगठन के मुताबिक, पुलिस में निर्णय कानून, नियमों और निर्धारित पदानुक्रम के आधार पर लिए जाते हैं, न कि किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में।एसोसिएशन ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के संबंध में सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यों और पद की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बाबूलाल मरांडी ने पोस्ट में क्या कहा था?
बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में डीजीपी तदाशा मिश्रा को संबोधित करते हुए उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में डीजीपी नियुक्ति मामले की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार को डीजीपी नियुक्ति के कानूनी आधार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन को स्पष्ट करना होगा।
अपने पोस्ट में मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड पुलिस की वास्तविक कमान मुख्यमंत्री आवास से संचालित हो रही है और इस संदर्भ में उन्होंने एएसआई अजय सिंह का नाम लिया।
मरांडी ने डीजीपी को संबोधित करते हुए इस्तीफा देने की सलाह भी दी थी। उन्होंने अपने पोस्ट में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता का भी उल्लेख किया और डीजीपी तदाशा मिश्रा से पद और सेवा की गरिमा को लेकर निर्णय लेने की अपील की थी।फिलहाल डीजीपी नियुक्ति से जुड़े मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच झारखंड पुलिस एसोसिएशन की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद विवाद और चर्चा में आ गया है।












