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Jharkhand High Court: नियमितिकरण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 20 साल से काम कर रहे कर्मचारी होंगे नियमित, हाईकोर्ट ने कहा- पहले पद सृजित करें, फिर नियमितीकरण पर करें विचार

Jharkhand High Court ने दुमका सेटलमेंट ऑफिस के लंबे समय से कार्यरत सफाई मोहिरों के मामले में राज्य सरकार को पहले पद सृजन और फिर नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने नियमितिकरण पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पद सृजित नियमितिकरण के आदेश दिये हैं। हाईकोर्ट ने 20 साल से काम कर रहे अनियमित कर्मचारी को नियमिति करने को कहा है। दरअसल दुमका सेटलमेंट ऑफिस में लंबे समय से सफाई मोहिर के रूप में काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा नियमों के तहत तत्काल नियमितीकरण संभव नहीं है, लेकिन वर्षों से लगातार सेवा लिए जाने को देखते हुए राज्य सरकार को पहले संबंधित पदों के सृजन और स्वीकृति पर विचार करना होगा। इसके बाद कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे पर निर्णय लिया जाए।अदालत ने यह आदेश 30 सितंबर 2026 को डब्ल्यूपीएस संख्या 3754/2023 में सुनाया।

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आठ कर्मचारियों ने दायर की थी याचिका

मामला दुमका सेटलमेंट ऑफिस में सफाई मोहिर के रूप में कार्यरत आठ कर्मचारियों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से भूमि अभिलेख तैयार करने और उनसे जुड़े कार्यों में सेवाएं दे रहे हैं। वर्षों तक लगातार काम करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कुछ कर्मचारी 1992 से, जबकि अन्य 1997 और 2001 से काम कर रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2001 में लिखित परीक्षा के बाद 50 उम्मीदवारों का चयन किया गया था, जिसमें वर्तमान याचिकाकर्ताओं में से तीन भी शामिल थे। अदालत ने इस तथ्य पर गौर करते हुए कहा कि इनकी नियुक्तियां विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के बाद हुई थीं।

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सरकार ने कहा- स्वीकृत पद ही नहीं हैं

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि जिन पदों पर याचिकाकर्ता काम कर रहे हैं, वे स्वीकृत पद नहीं हैं। ऐसे में 2015 की नियमितीकरण नियमावली और उसके संशोधित प्रावधानों के तहत उनका नियमितीकरण नहीं किया जा सकता।सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि सफाई मोहिरों को संबंधित सरकारी सर्कुलर के तहत पीस रेट के आधार पर भुगतान किया जाता है।

हाईकोर्ट ने माना- काम लंबे समय से लगातार लिया जा रहा

अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और याचिकाकर्ताओं की सेवा अवधि पर विचार करते हुए पाया कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्त होकर दो दशक से अधिक समय तक काम किया है। भूमि अभिलेखों के रखरखाव से जुड़ा काम भी लगातार राज्य की आवश्यकता का हिस्सा रहा है।

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हालांकि कोर्ट ने तत्काल नियमितीकरण का आदेश नहीं दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि केवल मौजूदा नियमितीकरण नियमों के दायरे में नहीं आने के आधार पर कर्मचारियों के दावे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

पहले पद सृजन, फिर नियमितीकरण पर फैसला

हाईकोर्ट ने कहा कि नए पदों का सृजन और उन्हें स्वीकृति देना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए सरकार को संबंधित पदों के सृजन और स्वीकृति पर विचार करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावे पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।अदालत ने दुमका सेटलमेंट ऑफिस से कर्मचारियों के काम की अवधि, उसकी निरंतरता और प्रकृति से संबंधित जानकारी भी जुटाने का निर्देश दिया है।

तीन महीने में दस्तावेज देने होंगे

कोर्ट के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को तीन महीने के भीतर सेटलमेंट ऑफिसर, दुमका के समक्ष अपनी सेवा अवधि, काम की नियमितता और भुगतान से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।इसके बाद सेटलमेंट ऑफिसर दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें दो महीने के भीतर राज्य के संबंधित अधिकारी को भेजेंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार को चार महीने के भीतर पद सृजन और नियमितीकरण के दावे पर निर्णय लेना होगा।

2023 में लौटाई गई थी नियमितीकरण की सिफारिश

मामले की पृष्ठभूमि में 6 अप्रैल 2023 का आदेश भी महत्वपूर्ण है। दुमका के डिप्टी कलेक्टर (स्थापना) ने नियमितीकरण की सिफारिश यह कहते हुए वापस कर दी थी कि संबंधित पद स्वीकृत नहीं हैं।हाईकोर्ट ने इस आदेश में नियमों के स्तर पर कोई अवैधता नहीं मानी, लेकिन कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सेवा को देखते हुए राज्य सरकार को पद सृजन और उसके बाद नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है।फिलहाल अदालत के आदेश के बाद आठों याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण का रास्ता राज्य सरकार द्वारा पद सृजन और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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