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करोड़पति भिखारी : तीन बंगला, एक तीन मंजिला इमारत, भाड़े पर तीन ऑटो व 10 लाख सूद पर, कार पर भीख मांगने निकलता था…लाखों बैंक बैलेंस भी, ऐसा भी है भिखारी…

Millionaire Beggar: Three bungalows, a three-storey building, three auto rickshaws on rent and Rs 10 lakh interest, used to go out begging in the car... bank balance of lakhs too, such is the beggar...

Hightech Beggar21.1.26: एक ऐसा करोड़पति भिखारी का पता चला है, जो राह चलते लोगों से तो भीख मांगता था, लेकिन हकीकत में वो खुद कार से चलता था, जिसके पास लाखों का बैंक बैलेंस था। भिखारी की संपत्ति जानकर लोग भी हैरान परेशान हैं। पूरा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर शहर का है। इंदौर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान प्रशासन ने एक ऐसे भिखारी को बचाया, जो कुष्ठ रोग से पीड़ित होने के बावजूद लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक निकला।

सर्राफा क्षेत्र से रेस्क्यू किये गए 50 वर्षीय कुष्ठ रोग से पीड़ित एक भिखारी के पास लाखों रुपये की संपत्ति होने की शुरुआती जानकारी मिली है। प्रशासन का कहना है कि भिखारी, दरअसल गरीब नहीं, बल्कि करोड़पति है। उसके पास तीन पक्के मकानों, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा का मालिक है, जिन्हें वह किराये पर देकर नियमित आय अर्जित करता है। इस खुलासे के बाद शहर में भिक्षावृत्ति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

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आम नागरिकों से मिली सूचना के आधार पर सर्राफा क्षेत्र में अभियान चलाया गया, जहां एक कुष्ठ रोगी को भिक्षावृत्ति करते हुए पाया गया। उसे तुरंत भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर आश्रय गृह में भेजा गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह व्यक्ति न केवल संपन्न है, बल्कि उसकी आय के कई स्रोत भी हैं।

संबंधित व्यक्ति के पास तीन पक्के मकान हैं, जिनमें एक तीन मंजिला इमारत भी शामिल है। इसके अलावा उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं, जिन्हें उसने किराये पर दे रखा है। चौंकाने वाली बात यह है कि वह एक कार में बैठकर भीख मांगने जाता था और इसके लिए उसने एक चालक भी रखा हुआ था। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति 2021-22 से नियमित रूप से भिक्षावृत्ति कर रहा था।

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अधिकारी ने यह भी बताया कि कुष्ठ रोग के कारण करोड़पति भिखारी  पहियों के सहारे चलने वाली घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता था, जिससे लोगों में सहानुभूति पैदा होती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने सर्राफा क्षेत्र में कई लोगों को चार से पांच लाख रुपये उधार दे रखे हैं, जिनसे वह रोजाना ब्याज वसूलता है। इस ब्याज से उसे प्रतिदिन लगभग 1,000 से 2,000 रुपये की आमदनी होती थी, जबकि भीख से उसे रोज 400 से 500 रुपये अतिरिक्त मिल जाते थे।

जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने कहा कि इंदौर को ‘भिक्षुकमुक्त शहर’ घोषित किया गया है और यहां भीख मांगने, भीख देने और भिखारियों से कोई भी सामान खरीदने पर कानूनी रोक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही भिक्षावृत्ति की सूचना मिलती है, प्रशासन अभियान चलाकर संबंधित व्यक्ति का पुनर्वास करता है। सर्राफा क्षेत्र से बचाए गए इस व्यक्ति की संपत्तियों की फिलहाल जांच की जा रही है और तथ्यों की पुष्टि के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।जांच के बाद ही ऐसे करोड़पति भिखारी का पता चल पाया है।

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हालांकि, इस पूरे मामले पर सामाजिक संगठनों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। भिक्षावृत्ति उन्मूलन के क्षेत्र में कार्यरत गैर सरकारी संगठन ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रूपाली जैन ने कहा कि इस मामले को केवल कानून के नजरिये से नहीं, बल्कि इंसानियत के आधार पर भी देखा जाना चाहिए।

करोड़पति भिखारी ने बताया कि यह व्यक्ति पहले मकान निर्माण में मिस्त्री का काम करता था। कुष्ठ रोग के कारण उसके हाथ-पैरों को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिससे वह काम करने में असमर्थ हो गया। इसके बाद सामाजिक और पारिवारिक भेदभाव के चलते वह मुख्यधारा से कट गया और मजबूरी में सर्राफा क्षेत्र की चाट-चौपाटी के पास रात के समय भीख मांगने लगा।

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