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झारखंड- 80 करोड़ का सांपों का जहर : करोड़ों के सांप के जहर का वैज्ञानिक परीक्षण शुरू, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट करेगा जांच, आईएफएस के नेतृत्व में तस्करी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई

Jharkhand – Snake venom worth 80 crores: Scientific testing of snake venom worth crores begins, Wildlife Institute to investigate, IFS-led crackdown on smuggling network

पलामू। 80 करोड़ रुपये के सांपों के जहर की अब विस्तृत जांच होगी। इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII), देहरादून को जब्त सांपों का जहर भेजा जायेगा, ताकि ये पता चल सके, जो सांपों का जो जहर बरामद किया गया है, आखिरकार वो किन सांपों का है। आपको बता दें कि पिछले साल ही वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े करीब 80 करोड़ रुपये कीमत के सांप के जहर की बड़ी खेप बरामद की गई थी।

जांच में झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के खुलासे के संकेत मिले थे। नवंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर करीब 1200 ग्राम सांप का जहर बरामद किया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 80 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई में पैंगोलिन का स्कल और शल्क भी जब्त किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि मामला सिर्फ सांप के जहर तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

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वन विभाग के अनुसार, बरामद सांप के जहर को वैज्ञानिक जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII), देहरादून भेजा गया है। वहां यह जांच की जाएगी कि जहर किस प्रजाति के सांप का है, उसकी विषाक्तता कितनी है और यह जहर कितना पुराना है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

पलामू के डीएफओ सत्यम कुमार ने बताया कि इस मामले की जांच आईएफएस अधिकारी नवनीत के नेतृत्व में की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि सांप का जहर स्थानीय स्तर पर ही इकट्ठा किया गया था, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजने की पूरी तैयारी थी। जिस कंटेनर में जहर रखा गया था, उस पर फ्रांस की एक कंपनी का लोगो मिला है, जिससे इस नेटवर्क के यूरोप से जुड़े होने की आशंका और मजबूत हो गई है।

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नवंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में यह छापेमारी झारखंड के पलामू जिले के हरिहरगंज क्षेत्र और बिहार के औरंगाबाद जिले के देव इलाके में की गई थी। इसी दौरान वन विभाग और WCCB की टीम ने इस तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया। यह पलामू क्षेत्र में पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में सांप का जहर बरामद किया गया है, जिसने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है।

इस मामले में अब तक तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सात अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के औरंगाबाद जिले के देव निवासी मोहम्मद सिराज, मोहम्मद मिराज और पलामू के हरिहरगंज क्षेत्र के कौवाखोह निवासी राजू कुमार के रूप में हुई है। इनके पास से पैंगोलिन का शल्क भी बरामद किया गया है, जिसकी बाजार में कीमत 15 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है।

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वन विभाग और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम पिछले कई दिनों से इस नेटवर्क के खिलाफ लगातार छापेमारी कर रही थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़े कई अन्य ठिकानों और तस्करों की जानकारी मिली है, जिसके आधार पर आगे भी छापेमारी और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

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