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धनबाद: DC-SP सहित कई पुलिस अफसरों पर गिरने वाली हैं गाज, कोल माफिया-अफसरों की सेटिंग का खुलासा करने अफसरों की संपत्ति की जांच शुरू, कई IAS-IPS आयेंगे निशाने पर…

Dhanbad: Several police officers, including the DC and SP, are facing action. Investigations into the officers' properties have begun to uncover the collusion between the coal mafia and the officers. Several IAS and IPS officers will be targeted...

धनबाद। धनबाद में कोयला तस्करी में माफिया और अफसरों के बीच गठजोड़ का बड़ा खुलासा हो सकता है। खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग ने संयुक्त रूप से मामले की जांच में जुट गयी है। जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक साल 2015 से जिले में तैनात रहे कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी आ गए हैं।इस कार्रवाई को न केवल तस्करों के खिलाफ, बल्कि प्रशासन और माफिया के कथित गठजोड़ पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

जांच एजेंसियों ने वर्ष 2015 के आसपास धनबाद में तैनात रहे तत्कालीन उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की संपत्तियों, आय के स्रोतों और लेन-देन की जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कोयला तस्करी बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं हो सकती।

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इस पूरे मामले में धनबाद के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव कुमार को जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर कोयला तस्करी नेटवर्क का अहम चेहरा बताया है। एजेंसियों का आरोप है कि संजीव कुमार की भूमिका केवल लापरवाही तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके संरक्षण में कोयला तस्करी का एक संगठित नेटवर्क संचालित किया गया। यह भी आरोप है कि राज्य सरकार को अंधेरे में रखकर तस्करी के इस अवैध कारोबार को लंबे समय तक फलने-फूलने दिया गया।

संजीव कुमार के अलावा अमर पांडेय सहित कई डीएसपी, थाना प्रभारियों और उस समय के कई इंस्पेक्टरों के खिलाफ भी जांच तेज कर दी गई है। तत्कालीन इंस्पेक्टर रंधीर सिंह समेत कई अधिकारी अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पूछताछ और छापेमारी का दायरा और बढ़ सकता है।

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जांच एजेंसियों ने कोयला तस्करों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डेटा, लेन-देन से जुड़ी फाइलें और डायरियां बरामद की हैं। इन साक्ष्यों में कथित रूप से अधिकारियों और तस्करों के बीच संपर्क, पैसों के लेन-देन और नेटवर्क संचालन से जुड़े संकेत मिले हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर अब जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक कोयला तस्करी की कमर तोड़ने के लिए केंद्र सरकार पहले ही उच्चस्तरीय बैठकें कर चुकी है। इस पूरे मामले पर केवल जांच एजेंसियां ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का शीर्ष स्तर भी नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि ED की इस कार्रवाई की निगरानी स्वयं केंद्रीय गृह सचिव स्तर से की जा रही है, जिससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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धनबाद में हुई यह कार्रवाई न केवल कोयला तस्करी के खिलाफ एक बड़ा संदेश है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि अब प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल और तेज हो सकती है।

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