हेमंत कैबिनेट ब्रेकिंग: 27 फैसलों पर मंत्रिपरिषद ने लगायी मुहर, आचार संहिता की वजह से नहीं हुई प्रेस ब्रीफिंग, मुख्यमंत्री ने कहा…
Hemant Cabinet Breaking News: The Council of Ministers approved 27 decisions; no press briefing was held due to the model code of conduct, the Chief Minister said...

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नगर निकाय चुनाव के चलते लागू आदर्श आचार संहिता के कारण फैसलों की औपचारिक प्रेस ब्रीफिंग नहीं हो सकी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के बजट, महंगाई और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर तीखा हमला बोला।
रांची/5.2.26। झारखंड मंत्रालय में गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्यहित से जुड़े कुल 27 प्रस्तावों पर कैबिनेट की स्वीकृति दी गई। हालांकि, नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर राज्य में लागू आदर्श आचार संहिता के चलते इन फैसलों को लेकर परंपरागत रूप से होने वाली प्रेस ब्रीफिंग इस बार नहीं हो सकी। आमतौर पर कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को फैसलों की विस्तृत जानकारी दी जाती है, लेकिन आचार संहिता प्रभावी होने के कारण सरकार ने इससे परहेज किया। जानकारी के मुताबिक जेपीएससी छात्रों के उम्र को लेकर फैसले की उम्मीद थी, लेकिन कैबिनेट में आज इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित न करने और निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करने के उद्देश्य से सरकार ने यह निर्णय लिया कि कैबिनेट के फैसलों को सार्वजनिक मंच पर विस्तार से प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद यह साफ है कि बैठक में कई अहम और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिनका असर आने वाले दिनों में दिख सकता है।
आचार संहिता का असर, फैसलों पर सन्नाटा
नगर निकाय चुनाव को लेकर लागू आदर्श आचार संहिता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा असर डाला है। इसी वजह से मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद मीडिया को किसी भी तरह की आधिकारिक ब्रीफिंग नहीं दी गई। इससे राजनीतिक हलकों में फैसलों को लेकर अटकलों का दौर भी शुरू हो गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि सभी निर्णय नियमों के दायरे में लिए गए हैं और समय आने पर उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
बैठक के बाद केंद्र सरकार पर सीएम का हमला
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार की नीतियों और हालिया बजट को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को गौर से देखने की जरूरत है। “चाहे कृषि की बात हो या अन्य सेक्टर की, यह देखना जरूरी है कि इसमें वास्तव में क्या प्रावधान किए गए हैं और उनका असर आम जनता पर क्या पड़ेगा,” मुख्यमंत्री ने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शायद यह समझ नहीं पा रही है कि उसकी नीतियों का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। सीएम ने बढ़ती महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दाल और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें तक महंगी हो गई हैं। “आखिर केंद्र सरकार करना क्या चाहती है?” उन्होंने सवाल किया।
लोकतंत्र और सांसदों के सम्मान पर सवाल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद की कार्यवाही और विपक्ष के नेताओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के लिए सांसदों का सम्मान तक नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
असम की स्थिति पर टिप्पणी
सीएम सोरेन ने असम की स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां हालात विचित्र हैं। उन्होंने कहा, “वहां ऐसा लगता है जैसे देश के अंदर एक और देश हो। अंग्रेजी शासन के दौर की याद दिलाने वाली स्थिति बन रही है। जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता है, उसे मारा जाता है।”








