झारखंड में हथकड़ी में शादी : 7 सालों का प्रेम संबंध, कुंवारी मां, हथकड़ी में दुल्हा, …और फिर कोर्ट के आदेश पर पुलिस वाले बने घराती-बाराती… जानिये पुलिस के पहरे में शादी का सच
A Wedding in Handcuffs in Jharkhand: A Seven-Year Romance, an Unwed Mother, a Handcuffed Groom... and Then, Acting on a Court Order, Police Officers Stepped in as the Wedding Hosts and Guests. Discover the Full Story Behind This Police-Guarded Wedding.

लातेहार : सात सालों से अधूरी प्रेम कहानी अदालत के आदेश पर पूरी हो गयी। हैरान करने वाली मोहब्बत की ये दास्तां झारखंड के लातेहार जिले की है। प्रेमी युगल का विवाह अदालत के आदेश पर संपन्न कराया गया। खास बात यह रही कि यह शादी पुलिस सुरक्षा के बीच मंदिर परिसर में हिंदू रीति-रिवाज से कराई गई। इस घटना ने इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला चंदवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता सीमा कुमारी (पिता- बीरबल लोहरा, निवासी भूसाढ़, लातेहार) ने थाना में मामला दर्ज कराया था। शिकायत में उन्होंने बताया कि रामपाल गंझू (पिता- विशेश्वर गंझू, निवासी तुपी, चंदवा) के साथ उनका पिछले सात वर्षों से प्रेम संबंध था और दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे। इस दौरान उनके संबंध से एक पुत्र का भी जन्म हुआ।
बताया जाता है कि दोनों के रिश्ते को लेकर शुरुआत में कोई बड़ी समस्या नहीं थी, लेकिन बाद में युवक के परिवार ने इस संबंध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। परिवार के विरोध के चलते मामला धीरे-धीरे विवाद में बदल गया और अंततः पीड़िता को न्याय के लिए पुलिस और फिर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सीमा कुमारी ने चंदवा थाना में कांड संख्या 44/26 के तहत शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई के बाद मामला न्यायालय में पहुंचा। इसके बाद पीड़िता ने अदालत में आवेदन देकर आपसी सहमति से विवाह कराने की मांग की। मामले की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कुमारी जीव की अदालत ने दोनों पक्षों की परिस्थितियों और सहमति को देखते हुए विवाह कराने का आदेश पारित किया।
अदालत के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में आया और गुरुवार को लातेहार के अंबाकोठी स्थित प्राचीन देवी मंडप में विवाह समारोह आयोजित किया गया। यहां पुजारी दिलीप शुक्ला ने पूरे विधि-विधान के साथ दोनों का विवाह संपन्न कराया। पुलिस की मौजूदगी में दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को सामाजिक मान्यता दी।
इस विवाह समारोह के दौरान स्थानीय ग्रामीण और मंदिर समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे। सभी ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद भविष्य की कामना की। लंबे समय से साथ रहने के बावजूद सामाजिक और पारिवारिक स्वीकृति न मिलने के कारण जो रिश्ता अधर में लटका था, उसे अब कानूनी और सामाजिक मान्यता मिल गई है।









