झारखंड: 2034 शिक्षकों की भर्ती 3 जुलाई तक हर हाल में पूरी करें, हाईकोर्ट का JSSC और हाईकोर्ट को दो टूक निर्देश, कोर्ट ने देरी पर उठाये सवाल…
Jharkhand: Complete the recruitment of 2034 teachers by July 3 at any cost, the High Court has given clear instructions to JSSC and the High Court, the court has raised questions on the delay...

झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक भर्ती के 2034 रिक्त पदों पर नियुक्ति में देरी को लेकर सरकार और JSSC पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने 3 जुलाई तक आदेश का पालन करने का अंतिम मौका दिया है।
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रांची/1.5.26। हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने दो टूक कहा है कि लंबे समय से लंबित 2034 रिक्त पदों पर नियुक्ति न होना न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के समान है।
आपको बता दें कि यह मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2016 में आयोजित परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी, लेकिन वर्षों बाद भी नियुक्ति नहीं मिल पाई। इस संबंध में पहले ही अदालत की एकल पीठ ने 1 सितंबर 2025 को आदेश देते हुए सरकार को छह महीने के भीतर सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा था।
इस, निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो मनोज कुमार गुप्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर की। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार और JSSC से कड़ा जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि आखिर 1 सितंबर 2025 के आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं किया गया। इस पर प्रतिवादियों की ओर से बताया गया कि 26 सितंबर 2025 को इस आदेश के खिलाफ अपील याचिका दायर की गई है, जिस पर फिलहाल सुनवाई जारी है।हालांकि अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना।
कोर्ट का कहना था कि केवल अपील लंबित होने के आधार पर एकल पीठ के आदेश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों का पालन करना अनिवार्य है, चाहे उस पर अपील क्यों न लंबित हो।कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार और आयोग को एक और मौका देते हुए 3 जुलाई तक की अंतिम समय सीमा तय की है।
अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो वह कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होगी।इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता और चंचल जैन ने पक्ष रखा। वहीं JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं।









