रांची: गैंगरेप की आरोपी मेडिकल छात्रा का जाति प्रमाण पत्र फर्जी, रिम्स ने कर दिया एडमिशन रद्द, आगे भी बढ़ सकती है मुश्किलें…
Ranchi: Medical student accused of gang rape has fake caste certificate, RIMS cancels her admission, further difficulties may arise...

रांची के चर्चित MDS छात्रा सामूहिक दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार आरोपी ओली विश्वकर्मा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। रामगढ़ उपायुक्त की जांच में उसका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद रिम्स प्रशासन ने उसका नामांकन रद्द कर दिया है।
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रांची। चर्चित एमडीएस छात्रा सामूहिक दुष्कर्म मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। मामले में गिरफ्तार आरोपी मेडिकल स्टूडेंट ओली विश्वकर्मा की परेशानियां अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। रामगढ़ उपायुक्त द्वारा कराई गई जांच में उसका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है, जिसके बाद राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए उसका नामांकन रद्द कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, रिम्स के डीन कार्यालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। साथ ही नामांकन रद्द करने की सूचना संबंधित छात्रा और रामगढ़ उपायुक्त को भी भेज दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद की गई, जिससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आपको बताया जा रहा है ओली विश्वकर्मा ने रिम्स डेंटल कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई भी पूरी की थी। ऐसे में अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि उसने उस दौरान भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर दाखिला लिया हो सकता है। यदि ऐसा पाया जाता है, तो उसके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई संभव है।
यह पूरा मामला उस समय सामने आया था, जब बरियातू स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रहकर एमडीएस की पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया था। पीड़िता के अनुसार, यह घटना हरमू क्षेत्र के गोकुल वाटिका अपार्टमेंट में आयोजित एक जन्मदिन पार्टी के दौरान हुई थी। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में दानिश समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें ओली विश्वकर्मा का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।
इस बीच जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने का मामला सामने आने से आरोपी की कानूनी स्थिति और भी जटिल हो गई है। एक ओर वह गंभीर आपराधिक मामले में पहले से आरोपी है, वहीं अब दस्तावेजों में धोखाधड़ी का आरोप भी उस पर जुड़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लिया गया है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अन्य योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता होती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।







