झारखंड- मजदूर की बेटी बनी टॉपर: पिता करते हैं दिहाड़ी, मां है कामिन, अब बेटी ने इंटर की परीक्षा में 500 में से 473 नंबर लाकर कर दिया कमाल
Jharkhand – Laborer's daughter becomes topper: Father works as a daily wage labourer, mother is a worker, now daughter has done wonders by scoring 473 out of 500 in the intermediate examination.

झारखंड में मजदूर की बेटी स्टेट टॉपर बनी है। ओरमांझी प्रखंड के सदमा गांव की छात्रा अंशु कुमारी ने इंटर आर्ट्स परीक्षा 2026 में 473 अंक हासिल कर राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई।
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रांची। मुश्किल रास्ते कभी भी प्रतिभा का रास्ता नहीं रोकते। ऐसा ही कुछ हुआ झारखंड में इंटर के रिजल्ट में। झारखंड के ओरमांझी प्रखंड के सदमा गांव से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। पीएम श्री प्रोजेक्ट प्लस टू हाई स्कूल, सदमा की मेधावी छात्रा अंशु कुमारी ने इंटर आर्ट्स परीक्षा 2026 में 473 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में तीसरा स्थान हासिल किया है।
उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। अंशु कुमारी एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। उनके पिता श्रवण लोहरा दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि उनकी माता किरण देवी भी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। कई बार काम नहीं मिलने की वजह से परिवार को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसके बावजूद अंशु ने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और लगातार मेहनत करती रहीं। घर की परिस्थितियों को देखते हुए अंशु ने अपनी पढ़ाई नानी के घर चडी गांव में रहकर पूरी की। उन्होंने वहां पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। अंशु बताती हैं कि वह रोजाना 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई करती थीं।
उन्होंने सोशल मीडिया और मोबाइल से दूरी बनाए रखी, जिससे उनका पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर रहा।अंशु कुमारी का मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास है। उन्हें पहले से ही विश्वास था कि वह 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करेंगी।
कठिन परिस्थितियों को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी ताकत में बदलकर लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती रहीं।भविष्य को लेकर अंशु का सपना एक सफल शिक्षक बनने का है। वह शिक्षा के माध्यम से समाज में योगदान देना चाहती हैं और अपने माता-पिता के सपनों को साकार करना चाहती हैं।
अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के अन्य सदस्यों—नाना-नानी, मामा-मामी और चाचा-चाची—को दिया है, जिनका उन्हें हमेशा सहयोग मिला।अंशु की सफलता की खबर जैसे ही उनके माता-पिता तक पहुंची, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उस समय दोनों मजदूरी के लिए गांव से बाहर थे और उन्हें रिजल्ट की जानकारी नहीं थी।
फोन पर जब उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी ने राज्य में तीसरा स्थान हासिल किया है, तो वे तुरंत घर लौट आए। मां किरण देवी ने बेटी को गले लगाकर खुशी के आंसू बहाए और कहा कि खुद पढ़ाई पूरी न कर पाने का जो मलाल था, वह अब बेटी की सफलता से पूरा हो गया है।विद्यालय में भी अंशु की इस उपलब्धि को लेकर जश्न का माहौल है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सीमा रानी गुप्ता ने खुशी जताते हुए कहा कि अंशु ने स्कूल का नाम रोशन किया है और अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनी हैं।







