रिटायरमेंट के 20 साल बाद विभाग को याद आया ‘पद स्वीकृत नहीं था’, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, पेंशन कटौती का आदेश किया रद्द
यदि कर्मचारी ने पूरी सेवा बिना किसी आपत्ति के पूरी की है, तो रिटायरमेंट के 20 साल बाद उसके पद की वैधता पर सवाल उठाकर वेतन और पेंशन में कटौती करना न केवल अवैध, बल्कि पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

रांची। झारखंड में विभागीय निष्क्रियता के अजब-गजब मामले आते हैं। नया मामला उच्च शिक्षा विभाग से जुड़ा है, जहां सेवानिवृत्ति के दो दशक बाद एक कर्मचारी के वेतनमान और पेंशन में कटौती करने के सरकारी फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि कर्मचारी ने पूरी सेवा बिना किसी आपत्ति के पूरी की है, तो रिटायरमेंट के 20 साल बाद उसके पद की वैधता पर सवाल उठाकर वेतन और पेंशन में कटौती करना न केवल अवैध, बल्कि पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला रांची विश्वविद्यालय के 81 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी अंजन कुमार घोष की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। हाईकोर्ट ने कर्मचारी को राहत देते हुए सरकार के सभी आदेश को रद्द कर दिया। ये फैसला कर्मचारियों के लिए एक नजीर भी है।
20 साल बाद घटा दी पेंशन
अंजन कुमार घोष वर्ष 2003 में रांची विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग से वर्कशॉप सुपरिटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। लेकिन वर्ष 2023 में राज्य के उच्च शिक्षा निदेशालय ने यह कहते हुए उनके वेतनमान और पेंशन में कटौती कर दी कि जिस पद पर वे कार्यरत थे, वह कथित रूप से स्वीकृत (Sanctioned) नहीं था। यानी जिस पद पर कर्मचारी ने पूरी सेवा दी और उसी आधार पर सेवानिवृत्त भी हुए, उसी पद को विभाग ने करीब 20 साल बाद अस्वीकृत बताकर उनकी पेंशन कम कर दी।
हाईकोर्ट ने कहा- रिकॉर्ड सरकार के दावे से अलग
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया और पाया कि याचिकाकर्ता यूजीसी (UGC) से स्वीकृत पद पर कार्यरत थे। अदालत ने सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेज विभाग के दावे का समर्थन नहीं करते।कोर्ट ने अपने पूर्व के रत्नी उरांव मामले के फैसले का भी हवाला देते हुए कहा कि यदि सेवा अवधि के दौरान कभी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई, तो सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद पेंशन या वेतनमान में कटौती नहीं की जा सकती।
सरकार का आदेश रद्द, 12 सप्ताह में भुगतान के निर्देश
हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा जारी पेंशन कटौती के आदेश को निरस्त करते हुए रांची विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को पांचवें और छठे वेतनमान का पूरा लाभ दिया जाए।इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि कटौती की गई पूरी बकाया राशि का भुगतान 12 सप्ताह के भीतर किया जाए।
कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
यह फैसला उन हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके सेवा लाभ या पेंशन को वर्षों बाद प्रशासनिक कारणों से प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विभागीय लापरवाही या वर्षों बाद की गई समीक्षा का खामियाजा किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को नहीं भुगतना पड़ेगा।








