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Para Teacher Pension Calculation: पारा शिक्षकों की पेंशन का कैसे होगा कैलकुलेशन? हाईकोर्ट के फैसले के बाद समझिए पूरा गणित

झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद पारा शिक्षकों की पेंशन कैसे तय होगी? जानिए संविदा सेवा जुड़ने से किसे होगा फायदा और किस तरह बदल जाएगा पूरा पेंशन कैलकुलेशन।

Para Teacher News। झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पारा शिक्षकों की पेंशन अब किस आधार पर तय होगी? क्या सिर्फ पारा सेवा जोड़ देने से पेंशन की राशि बढ़ जाएगी या पहले जो शिक्षक पेंशन के दायरे से बाहर थे, वे भी अब पेंशन के हकदार बन जाएंगे? दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि नियमित नियुक्ति से पहले पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा को भी पेंशन योग्य सेवा में शामिल किया जाएगा। इसका सीधा असर Qualifying Service यानी पेंशन के लिए मानी जाने वाली कुल सेवा अवधि पर पड़ेगा।

पहले क्या होता था?

मान लीजिए किसी शिक्षक ने—
• 12 वर्ष पारा शिक्षक के रूप में काम किया।
• इसके बाद 8 वर्ष नियमित शिक्षक रहे।
अब तक केवल 8 वर्ष की नियमित सेवा मानी जाती थी। चूंकि पेंशन के लिए न्यूनतम आवश्यक सेवा पूरी नहीं मानी जाती थी, इसलिए कई मामलों में पेंशन का लाभ नहीं मिल पाता था। क्योंकि सरकार ने न्यूनतम सेवा अवधि 10 साल को ही पेंशन के लिए स्वीकार्य माना है। ऐसे में 10 साल की सेवा पूरी नहीं करने वाले पारा शिक्षक पेंशन से अपात्र हो जाते थे।

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अब क्या बदलेगा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद—
• पारा सेवा = 12 वर्ष
• नियमित सेवा = 8 वर्ष
कुल सेवा = 20 वर्ष (यदि सरकार कोर्ट के आदेश के अनुरूप इसे पेंशन योग्य सेवा के रूप में स्वीकार करती है)।
यानी जो शिक्षक पहले पेंशन से वंचित थे, वे अब पेंशन के पात्र बन सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने कहा है कि पारा शिक्षक की संविदा सेवा को पेंशन योग्य सेवा (Qualifying Service) में जोड़ा जाए और उसके आधार पर पुनर्गणना (Recalculation) की जाए। अब विभाग को तय करना है, कि वो पेंशन के लिए किस आधार पर कैलकुलेशन करता है। इसके लिए सरकार को कोर्ट ने 2 महीने का वक्त दिया है।

हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी?

पेंशन की राशि केवल सेवा अवधि से तय नहीं होती। यह मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करती है—
• सेवानिवृत्ति के समय अंतिम मूल वेतन (Last Basic Pay)
• लागू पेंशन नियम
• कुल पेंशन योग्य सेवा
• सरकार द्वारा पुनर्गणना के बाद जारी आदेश
इसलिए सभी शिक्षकों की पेंशन एक जैसी नहीं होगी।

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एक उदाहरण से समझें

यदि किसी शिक्षक का अंतिम मूल वेतन ₹60,000 है और पुनर्गणना के बाद वह पेंशन का पात्र बनता है, तो सामान्य पेंशन नियमों के अनुसार उसे अंतिम मूल वेतन के अनुपात में पेंशन मिल सकती है। (सटीक राशि संबंधित सेवा नियमों और सरकारी गणना पर निर्भर करेगी।)यानी पहले जहां शून्य पेंशन मिल रही थी, वहीं अब हर महीने नियमित पेंशन मिलने का रास्ता खुल सकता है।

एरियर भी मिलेगा

यदि सरकार पुनर्गणना के बाद किसी शिक्षक को पेंशन के योग्य मानती है, तो पेंशन शुरू होने की प्रभावी तिथि और लागू नियमों के अनुसार बकाया (Arrears) का भुगतान भी करना पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए अब विभाग अपना समीकरण तैयार करेगा।

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हजारों शिक्षकों को क्यों है इस फैसले का इंतजार?

झारखंड में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवा देने के बाद नियमित नियुक्ति पाई। इनमें से कई शिक्षक रिटायर हो चुके हैं या अगले कुछ वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि सरकार हाईकोर्ट के फैसले को व्यापक रूप से लागू करती है, तो बड़ी संख्या में शिक्षकों को पहली बार मासिक पेंशन का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम लाभ प्रत्येक शिक्षक की व्यक्तिगत सेवा अवधि, अंतिम वेतन और लागू पेंशन नियमों के आधार पर अलग-अलग होगा।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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