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Jharkhand High Court: जमीन के टाइटल की जांच सब-रजिस्ट्रार का काम नहीं, हाईकोर्ट ने 4 अफसरों पर कार्रवाई की रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद और गोविंदपुर के चार सब-रजिस्ट्रारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और चार्ज मेमो रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि जमीन के टाइटल की जांच करना निबंधन अधिकारी का दायित्व नहीं है।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन निबंधन से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हुए धनबाद और गोविंदपुर में पदस्थ रहे चार निबंधन अधिकारियों को हाईकोर्ट ने राहत दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सब-रजिस्ट्रार या डिस्ट्रिक्ट सब-रजिस्ट्रार का दायित्व जमीन के मालिकाना हक (टाइटल) की जांच करना नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने चार अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई और जारी चार्ज मेमो को रद्द कर दिया।

इस मामले में न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने संतोष कुमार, सुजीत कुमार, मिहिर कुमार और श्वेता कुमारी की ओर से दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने माना कि पुराने और नए सर्वे खाता एवं प्लॉट नंबरों में अंतर को आधार बनाकर अधिकारियों पर कदाचार का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

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2020 की शिकायत से शुरू हुआ था मामला

दरअसल इस पूरे मामले की शुरुआत 7 अगस्त 2020 को हुई, जब रमेश कुमार राही नामक व्यक्ति ने धनबाद जिला अवर निबंधक कार्यालय और विभिन्न अंचल कार्यालयों में जमीन के निबंधन एवं म्यूटेशन में अनियमितताओं की शिकायत की थी। शिकायत के बाद राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव ने धनबाद के उपायुक्त को जांच के निर्देश दिए।

मामले को लेकर जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। आरोप था कि 2017 से 2020 के बीच कई निबंधन दस्तावेजों में पुराने सर्वे खाता एवं प्लॉट नंबरों का नए सर्वे रिकॉर्ड से मिलान नहीं किया गया। साथ ही दस्तावेजों के साथ संलग्न कागजात का संबंधित अंचल कार्यालय से सत्यापन नहीं कराने का भी आरोप लगाया गया।

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अधिकारियों ने कहा- टाइटल जांचना हमारी जिम्मेदारी नहीं

चारों अधिकारियों ने अपने जवाब में कहा कि जमीन का टाइटल, खतियान या रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की जांच करना निबंधन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके बावजूद वर्ष 2023 और 2025 में उनके खिलाफ झारखंड सरकारी सेवक नियमावली, 2016 के नियम-17 के तहत चार्ज मेमो जारी कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।इसके खिलाफ अधिकारियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। समान कानूनी प्रश्न होने के कारण अदालत ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘के. गोपी बनाम सब-रजिस्ट्रार’ मामले के फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि यदि दस्तावेज विधिसम्मत हैं, निर्धारित स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क जमा किया गया है तथा सभी औपचारिकताएं पूरी हैं, तो केवल टाइटल के विवाद के आधार पर निबंधन अधिकारी दस्तावेज का पंजीयन करने से इनकार नहीं कर सकता।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 21 के तहत सब-रजिस्ट्रार पर खाता एवं प्लॉट नंबर की स्वतंत्र रूप से सत्यता जांचने की कोई वैधानिक जिम्मेदारी नहीं डाली गई है।

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तीन से पांच साल की देरी पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने विभागीय कार्रवाई शुरू करने में हुई तीन से पांच वर्ष की देरी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि शिकायत और जांच रिपोर्ट वर्ष 2020 में ही सामने आ चुकी थी तथा अधिकारियों ने उसी समय अपना जवाब भी दे दिया था। इसके बावजूद कई वर्षों बाद चार्ज मेमो जारी करना उचित नहीं है।अदालत ने कहा कि विभाग इस असामान्य देरी का कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे संबंधित अधिकारियों को अनावश्यक मानसिक और प्रशासनिक नुकसान उठाना पड़ा।

भ्रष्टाचार या निजी लाभ का कोई आरोप नहीं

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चारों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, मिलीभगत, निजी आर्थिक लाभ या किसी को अनुचित फायदा पहुंचाने का कोई आरोप नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के अमरेश श्रीवास्तव मामले के निर्णय का भी हवाला देते हुए कहा कि केवल प्रक्रियागत आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती।

सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने चारों अधिकारियों के खिलाफ जारी विभागीय कार्रवाई और चार्ज मेमो को रद्द कर दिया। साथ ही सभी रिट याचिकाएं स्वीकार करते हुए लंबित अंतरिम आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया। यह फैसला 10 जुलाई 2026 को सुनाया गया।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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