रांची: खराब ACR की वजह से नहीं मिला प्रमोशन, डॉक्टर की याचिका पर हाईकोर्ट ने 2005 की खराब ACR की रद्द; अब होगी दोबारा जांच, जानिये पूरा मामला
झारखंड हाई कोर्ट ने ITBP के मेडिकल अधिकारी डॉ. बिनोद कुमार सिंह की 2005 की प्रतिकूल ACR रद्द कर दी। कोर्ट ने DG ITBP को 16 सप्ताह में नए सिरे से समीक्षा कर फैसला लेने का निर्देश दिया।

रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने डाक्टर की याचिका पर अहम आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने खराब ACR को रद्द कर दोबारा जांच के निर्देश दिये हैं। दरअसल डॉ बिनोद कुमार सिंह इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के मेडिकल अधिकारी हैं। अदालत ने वर्ष 2005 की खराब एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर उनके खिलाफ लिए गए फैसले को रद्द कर दिया है। साथ ही ITBP के महानिदेशक (DG) को पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कर 16 सप्ताह के भीतर नया फैसला लेने का निर्देश दिया है।
डॉ. बिनोद कुमार सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि वर्ष 2005 में जालंधर में उनकी तैनाती के दौरान तत्कालीन कमांडेंट ने कथित वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े कुछ बिलों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया था। उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और इसकी शिकायत भी की।
डॉ. सिंह का आरोप है कि इसी वजह से उनकी एसीआर में जानबूझकर खराब टिप्पणी दर्ज कर दी गई। इसका असर उनकी नौकरी पर पड़ा और उन्हें समय पर प्रमोशन नहीं मिला। जबकि उनके जूनियर अधिकारियों को पहले ही पदोन्नति दे दी गई थी। बाद में उन्हें प्रमोशन तो मिला, लेकिन देरी होने से उनकी वरिष्ठता (सीनियरिटी) प्रभावित हुई और आगे मिलने वाले प्रमोशन पर भी असर पड़ा।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि ITBP ने उनकी अपील पर फैसला करते समय उनके आरोपों और तथ्यों पर ठीक से विचार नहीं किया। केवल रिपोर्टिंग अधिकारी की टिप्पणी के आधार पर उनकी अपील खारिज कर दी गई थी।
इसी को देखते हुए अदालत ने वर्ष 2017 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया और ITBP को निर्देश दिया कि मामले की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि उस समय के किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी का रिकॉर्ड उपलब्ध हो, तो उसके आधार पर एसीआर का फिर से मूल्यांकन किया जाए और उसके बाद नया कारण सहित आदेश जारी किया जाए।








